तीखेलाल
हीरालाल: आजकल यह क्या चल रहा है? किसी ने सड़क में गड्ढा दिखा दिया, उसे पाकिस्तान भेज दो। किसी ने महंगाई पर सवाल उठा दिया, उसे पाकिस्तानी बोल दो। किसी ने अस्पताल की बदहाली पर सवाल उठा दिया, उसे राष्ट्र विरोधी कह दो।
तीखेलाल: हां, अभी उस वेदांत नाम के बच्चे का मामला देखा? सीबीएसई की कॉपी चेकिंग पर उसने सोशल मीडिया पर शिकायत की। अब बच्चा यह सोच रहा होगा कि उसे नंबर मिलेंगे या वीज़ा! लोगों ने उसे पाकिस्तानी बता दिया जबकि खुद सीबीएसई वाले अपनी गलती मान रहे हैं।
हीरालाल: दरअसल, हम लोग सवाल से ज्यादा सवाल पूछने वाले से परेशान हो जाते हैं। व्यवस्था सुधर जाए, इससे ज्यादा जरूरी हमें यह लगता है कि शिकायत करने वाला देशभक्त है या नहीं।
तीखेलाल: मुझे भी सबसे ज्यादा फिक्र इसी बात की है। मैंने एक किताब पढ़ी है। उसका नाम है The Power of Your Subconscious Mind। इसमें लिखा है कि हमारा अवचेतन मन उन विचारों को मजबूत करता रहता है, जिन्हें हम बार-बार सोचते हैं। यानी आप जैसा सोचते हैं, वैसा बनने लगते। फिक्र यही है कि अब अगर सुबह-शाम बस पाकिस्तान ही सोचेंगे, तो हमारा दिमाग लाहौर साइड वाला बाघा बॉर्डर न बन जाए।
हीरालाल: सही कह रहे हैं। हालत ये हैं कि नाली जाम हो जाए तो भी चर्चा पाकिस्तान पर पहुंच जाती है।
तीखेलाल: मुझे तो डर है कि अगर यही चलता रहा तो कुछ दिन बाद मां बोलेगी-बेटा दूध पी लो नहीं तो पाकिस्तान भेज दूंगी। पति, पत्नी से कहेगा नमक ज्यादा है, जाओ पाकिस्तान।
हीरालाल: बोलते तो ऐसे हैं कि जैसे जिला पासपोर्ट अधिकारी हों। कभी-कभी दिल करता है कि कह दूं कि अगर भेजना ही है तो किसी कायदे के देश में भेजो।
तीखेलाल- यही सही रहेगा, थोड़ा अपग्रेड सोचना चाहिए इन लोगों को। कोई व्यवस्था पर सवाल उठाए तो कहिए- जाइए भाई, आपको रिसर्च के लिए जर्मनी भेजते हैं। सड़क की शिकायत करो तो डेनमार्क भेजो, जहां साइकिल ट्रैक देखकर आत्मा प्रसन्न हो जाए। शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे तो फिनलैंड भेजो। टेक्नॉलजी की बात हो तो अमेरिका भेजो। कम से कम अवचेतन मन को भी लगे कि देश तरक्की के सपने देख रहा है, सिर्फ पड़ोसी देश के नाम का राष्ट्रीय कीर्तन नहीं कर रहा।
हीरालाल: सच्चे राष्ट्रवादी हो, नाराज हो तो जिससे नाराज हो उसे विकसित देशों में भेजो। ताकि अगला खुशी-खुशी चला भी जाए।
तीखेलाल: बिल्कुल। आखिर सोच बड़ी होगी तब ही तो देश बड़ा बनेगा। हर आलोचक को पाकिस्तान भेजते-भेजते कहीं ऐसा न हो कि एक दिन हम ही पाकिस्तान बन जाएं।



