NBT न्यूज, हिसार
हरियाणा में ढलती उम्र में मातृत्व का सुख चाहने वाली महिलाओं का रास्ता पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने साफ कर दिया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि अब हरियाणा में 50 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं भी आईवीएफ तकनीक अपनाकर मां बन सकेंगी। हिसार की महिला ने मां बनने पर पाबंदी हटाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। महिला का इलाज कर रहे वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. अनुराग बिश्नोई ने बुधवार को बताया कि उनके सेंटर में पिछले 25 वर्षों में 40 से 50 वर्ष से अधिक उम्र के हजारों दंपतियों का सफल इलाज हो चुका है। आज तक डिलीवरी के समय या बाद में किसी भी महिला की मृत्यु का कोई मामला सामने नहीं आया है।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के समयदंपति से एक शपथ पत्र मांगा, जिसमें किसी भी संभावित जटिलता की स्थिति में स्वयं जिम्मेदारी लेने की सहमति दी गई। दंपति द्वारा सहमति देने के बाद अदालत ने डॉ. अनुराग बिश्नोई के सेंटर को उपचार की अनुमति प्रदान कर दी।
माननीय न्यायमूर्ति जस्टिस जगमोहन बंसल ने अपने फैसले में महिलाओं के मातृत्व अधिकार की पैरवी करते हुए कहा कि "यदि महिला का स्वास्थ्य ठीक है, तो उसे मां बनने का पूरा अधिकार है। मां बनना कभी अनैतिक नहीं हो सकता और उम्र के आधार पर इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना बिल्कुल गलत है। दरअसल, देश के नए सरोगेसी और एआरटी (ART) कानून के तहत 50 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं के IVF उपचार पर कानूनी प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसी कानून के फेर में फंसा एक मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। हिसार की एक 51 वर्षीय महिला ने दोबारा मां बनने की इच्छा जताई थी। इससे पहले वे 49 वर्ष की उम्र में हिसार के ही 'नेशनल फर्टिलिटी सेंटर' में IVF से एक बेटी को जन्म दे चुकी थीं। डॉक्टरों ने उनके हार्ट चेकअप, अल्ट्रासाउंड समेत सभी शारीरिक टेस्ट किए, जिसमें वे फिट पाई गईं। अब एक राष्ट्रीय स्तर का वर्किंग ग्रुप गठित किया गया है, जो फैसला करेगा।



