n NBTन्यूज, फरीदाबाद
बड़खल विधानसभा क्षेत्र की वीआईपी मानी जाने वाली सैनिक कॉलोनी में करोड़ों की संपत्ति रखने वाले लोग आज पानी की बूंद-बूंद के लिए जूझ रहे हैं। यहां जमीन के दाम कम से कम दो लाख रुपये प्रति वर्गगज तक पहुंच चुके हैं, लेकिन हालात ऐसे हैं कि जमीन तो मिल जाएगी, पानी नहीं, जैसी बात अब कॉलोनीवासियों की हकीकत बन चुकी है। लोगों का कहना है कि 21वीं सदी में देश विकास की बातें कर रहा है, लेकिन मूलभूत जरूरत पानी का संकट खत्म नहीं हो पा रहा। कॉलोनी निवासी दिलीप ने पानी की समस्या को लेकर नगर निगम के कंट्रोल रूम में शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद हालात जस के तस हैं। सुबह-शाम पानी आने का कोई तय समय नहीं है और कई इलाकों में लोग मोटर चलाने या निजी टैंकरों पर निर्भर होने लगे हैं।
वैसे तो पूरे शहर में पानी संकट की शिकायतें सामने आती रहती हैं, लेकिन अब सैनिक कॉलोनी का संकट विकराल रूप लेने लगा है। करीब चार हजार निगम कनेक्शन वाली इस कॉलोनी में रोजाना लगभग 60 लाख लीटर पानी की जरूरत है, जबकि सप्लाई केवल 20 से 21 लाख लीटर तक सीमित है। जरूरत और आपूर्ति के बीच भारी अंतर के कारण कई ब्लॉकों में हालात गंभीर बने हुए हैं।
कॉलोनी के जे, ई और के ब्लॉक समेत कई हिस्सों में लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कुछ ब्लॉकों के लिए लगाए गए ट्यूबवेल खराब पड़े हैं, जबकि रेनीवेल का पानी अंतिम मकानों तक पर्याप्त दबाव के साथ नहीं पहुंच पा रहा। इसका असर यह है कि कई घरों में पानी नाममात्र पहुंच रहा है या कई बार बिल्कुल नहीं आता। स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या की एक बड़ी वजह तेजी से बढ़ता निर्माण भी है। कॉलोनी में नए मकान बन रहे हैं और पुराने मकानों पर अतिरिक्त मंजिलें तैयार की जा रही हैं, लेकिन वर्षों पुरानी और छोटी क्षमता वाली पाइपलाइन व्यवस्था आज भी वैसी ही बनी हुई है। बढ़ती आबादी और जरूरत के मुकाबले जल आपूर्ति तंत्र अपग्रेड नहीं होने से संकट लगातार गहराता जा रहा है।


