भूख की पीड़ा

नवभारतटाइम्स.कॉम•
charlie chaplins the gold rush a unique blend of hungers pain and humor
चार्ली चैपलिन जीवन की गहरी से गहरी त्रासदी में भी हास्य का कोई न कोई पहलू खोज लेते थे। ऐसा ही एक दृश्य उनकी प्रसिद्ध फिल्म ‘ द गोल्ड रश ’ में देखने को मिलता है। एक दिन चैपलिन ने अमेरिका के डोनर अभियान से जुड़ी एक हृदयविदारक घटना के बारे में पढ़ा। सन 1846 में कैलिफोर्निया जा रहे प्रवासियों का एक समूह बर्फ से ढके पहाड़ों में फंस गया था। भूख से बेहाल कुछ लोगों की हालत ऐसी हो गई कि उन्हें जिंदा रहने के लिए अपने चमड़े के जूते तक खाने पड़े। चार्ली चैपलिन के मन में विचार आया कि भूख और बेबसी की इस त्रासदी को पर्दे पर किस तरह दिखाया जाए। इसी सोच से उन्होंने एक ऐसा दृश्य रचा, जो सिनेमा के इतिहास में अमर हो गया। अपनी फिल्म ‘द गोल्ड रश’ में चैपलिन का पात्र भूख से व्याकुल होकर अपना जूता उबालता है और उसे किसी शाही पकवान की तरह परोसता है। दर्शक इस दृश्य पर ठहाके लगाते हैं, लेकिन उसके पीछे छिपी भूख की पीड़ा भी महसूस करते हैं। दुख को भी हास्य में ढालकर उसे यादगार बना देना चैपलिन की कला थी।

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