Infertility Treatment Causing Mental Stress To Women Taunts And Expenses Increasing Anxiety
महिलाओं को इलाज से ज्यादा तनाव दे रहे ताने
नवभारतटाइम्स.कॉम•
nदीक्षा गौड़, लखनऊ : मां बनने की चाह में इनफर्टिलिटी का इलाज करवा रहीं महिलाओं के लिए बार-बार जांच, दवाएं, इंजेक्शन और गर्भधारण के नतीजे का इंतजार मानसिक दबाव बढ़ा रहा है। इलाज में सफलता नहीं मिलने पर उम्मीद चिंता में बदलने लगती है। इसका असर महिलाओं की भावनात्मक स्थिति, जीवन गुणवत्ता और सामाजिक जीवन पर पड़ रहा है। ये तथ्य KGMU के कम्युनिटी मेडिसिन ऐंड पब्लिक हेल्थ विभाग के शोध में सामने आए हैं। शोध इंटरनैशनल जर्नल ऑफ रिप्रोडक्शन, कॉन्ट्रासेप्शन, ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गाइनीकॉलजी में प्रकाशित हुआ है।
62.80% महिलाओं की जीवन गुणवत्ता खराब : शोध में 18 से 40 वर्ष की प्राथमिक इनफर्टिलिटी का इलाज करवा रहीं 145 महिलाओं को शामिल किया गया। इनमें 62.80% की जीवन गुणवत्ता खराब मिली। वहीं, 63.40% का भावनात्मक, 62.10% का सामाजिक और 60.70% का शारीरिक व मानसिक स्थिति से जुड़ा स्कोर खराब पाया गया।लंबे इलाज और खर्च से बढ़ रहा दबाव : अध्ययन में 55.10% महिलाएं तीन साल से अधिक समय से इलाज करवा रही थीं। इनमें 31.70% तीन से पांच साल और 23.40% पांच साल से अधिक समय से उपचाररत थीं। 66.20% महिलाएं इलाज का खर्च खुद उठा रही थीं। लंबे उपचार, भावनात्मक सहयोग की कमी और आर्थिक दबाव को जीवन गुणवत्ता प्रभावित करने वाले प्रमुख कारण माना गया। रिश्तेदारों के सवाल और ताने भी तनाव बढ़ाते हैं। ऐसे में संतुलित खानपान, सामान्य दिनचर्या और नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ काउंसलिंग और परिवार व जीवनसाथी का सहयोग जरूरी है।
35-40% महिलाओं में मानसिक परेशानी : प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, KGMU की प्रो. स्मृति अग्रवाल के मुताबिक, इनफर्टिलिटी का इलाज करवा रहीं 35 से 40% महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां देखी जाती हैं। दवाओं, इंजेक्शन और बार-बार उपचार चक्र से गुजरने के बावजूद सफलता की गारंटी नहीं होती। मानसिक दबाव और चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए कुछ महिलाओं को उपचार के बीच विराम भी दिया जाता है।