Lohias Courage Against Apartheid Arrest In America And Demand For Justice For Black People
लोहिया का साहस
नवभारतटाइम्स.कॉम•
सन 1964 की बात है। अमेरिका के एरिजोना विश्वविद्यालय ने डॉ. राममनोहर लोहिया को भारतीय राजनीति, सविनय अवज्ञा और गांधीवादी विचारधारा पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया था। इसी दौरान मिसीसिपी राज्य में रंगभेद के खिलाफ आंदोलन चल रहा था। आंदोलनकारियों के आग्रह पर लोहिया वहां की राजधानी जैक्सन पहुंचे। उनके मेजबान उन्हें एक प्रसिद्ध कैफेटेरिया में भोजन कराने ले गए। लेकिन, वहां के मैनेजर ने यह कहकर प्रवेश देने से मना कर दिया कि यहां केवल गोरे लोगों को आने की अनुमति है। उन्होंने मैनेजर से स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘कल मैं फिर यहां आऊंगा।’ अगले दिन लोहिया अपनी घोषणा के अनुसार वहां पहुंच गए। कैफेटेरिया का मैनेजर अपने फैसले पर अड़ा रहा। आखिरकार पुलिस ने लोहिया को गिरफ्तार कर लिया। घटना की जानकारी अमेरिकी दूतावास तक पहुंची तो अधिकारियों ने लोहिया से भेदभाव के लिए माफी मांगी। लेकिन, उनका जवाब व्यक्तिगत अपमान से कहीं आगे की सोच को दर्शाता था। उन्होंने कहा कि माफी उनसे नहीं, बल्कि अश्वेत लोगों से मांगी जानी चाहिए, जिन्हें इस अन्याय का सामना करना पड़ रहा था। लोहिया के साथ हुई यह घटना बताती है कि सच्चा मानवतावाद केवल विचारों में नहीं, अन्याय के विरुद्ध खड़े होने के साहस में प्रकट होता है।