क्या रीपो रेट बढ़ने से बदलेगी निवेश की रणनीति?

नवभारतटाइम्स.कॉम•
repo rate hike need to change investment strategy
Sudha.Shrimali

@timesofindia.com
n मुंबई: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रीपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। इस फैसले ने म्यूचुअल फंड निवेशकों, स्टॉक्स में निवेश करने वाले, बॉन्ड्स व एफडी में निवेश करने वालों के लिए हालात बदल दिए हैं, खासकर तब जब सेंट्रल बैंक ने अपनी पॉलिसी का रुख न्यूट्रल से बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया है। इस बदलाव के बाद पैसा कहां लगाना समझदारी होगी? क्या एफडी में अधिक ब्याज मिलने का इंतजार करना चाहिए? क्या डेट म्यूचुअल फंड में नुकसान हो सकता है और क्या शेयर बाजार में निवेश का तरीका बदलने की जरूरत है?

आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के डायरेक्टर, ऋषिकेश पाल्वे कहते हैं, ‘ इसका असर स्वाभाविक रूप से फिक्स्ड डिपॉजिट, लोन, म्यूचुअल फंड और इक्विटी मार्केट पर अलग-अलग तरह से पड़ेगा।

ऋषिकेश पाल्वे कहते हैं कि FD निवेशकों के लिए, ये बढ़ी हुई ब्याज दरें FD को ज्यादा आकर्षक बना सकती हैं, खासकर इसलिए क्योंकि बैंक नए डिपॉजिट या रिन्यूअल पर बेहतर दरें दे सकते हैं। जिन लोगों ने रीपो रेट से जुड़े लोन लिए हैं, आमतौर पर बैंकों को अपनी दरों को पूरी तरह से बदलने में लगभग 4-6 हफ्ते लगते हैं।

पाल्वे के अनुसार डेट म्यूचुअल फंड के मामले में, हम जानते हैं कि बॉन्ड यील्ड और बॉन्ड की कीमतों में उल्टा संबंध होता है, इसलिए रेट बढ़ने की वजह से बॉन्ड की मौजूदा कीमतों में गिरावट की उम्मीद की जा सकती है। इसकी वजह से, शॉर्ट टर्म में डेट फंड की NAV पर कुछ दबाव पड़ सकता है। अगर निवेशक डेट में निवेश करना चाहते हैं, तो वे कम ड्यूरेशन वाले फंड या कम मैच्योरिटी वाले टारगेट मैच्योरिटी फंड चुन सकते हैं।

ऋषिकेश पाल्वे का मानना है कि अगर हम इक्विटी मार्केट को देखें, तो इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि लोन लेने की ज़्यादा लागत कंपनियों, उनकी कमाई और निवेशकों की सोच पर कैसा असर डालती है। कुछ स्टॉक, जो मॉनेटरी पॉलिसी में ऐसे बदलावों के प्रति संवेदनशील होते हैं, उनमें उतार-चढ़ाव दिख सकता है, लेकिन इसका व्यापक असर इस बात पर भी निर्भर करेगा

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