चार शक्तियों के मेल से जीवन में बढ़ते हैं हर काम

नवभारतटाइम्स.कॉम•
success in life with the combination of four powers the mahashakti sutra of desire knowledge action and balance
भारतीय ज्ञान परंपरा में किसी कार्य की सिद्धि का एक सरल सूत्र है- इच्छति, जानाति, करोति। यानी पहले इच्छा जागती है, फिर ज्ञान उसे दिशा देता है और अंत में कर्म उसे परिणाम तक पहुंचाता है। ये तीन शक्तियां इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति और क्रियाशक्ति के रूप में लक्ष्मी, सरस्वती और काली से जुड़ती हैं। लेकिन, जीवन में इनके साथ परिस्थितियों को संभालने की क्षमता भी जरूरी है। यही दुर्गा के रूप में शक्ति का चौथा आयाम सामने लाती है।

हर परिवर्तन की शुरुआत इच्छा से होती है। कुछ नया सीखने, लक्ष्य पाने या जीवन को सार्थक बनाने की आकांक्षा ही आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। लक्ष्मी का व्यापक स्वरूप केवल धन-संपत्ति तक सीमित नहीं है। वह लक्ष्यबोध और संकल्प की प्रतीक भी हैं। स्पष्ट लक्ष्य के बिना प्रतिभा दिशाहीन हो सकती है। इच्छा को दिशा देने के लिए ज्ञान आवश्यक है। सरस्वती ज्ञान, विवेक, मेधा, वाणी और सृजनशीलता की शक्ति हैं। ज्ञान केवल सूचनाएं जुटाना नहीं, उन्हें विचार, निर्णय और आचरण का हिस्सा बनाना है। आज आर्टिफिशल इंटेलिजेंस सूचनाएं तुरंत उपलब्ध करा सकती है, लेकिन विवेक और सही दिशा का महत्व बना हुआ है। शिक्षा का उद्देश्य ऐसी मेधा विकसित करना है, जो सत्य-असत्य में अंतर कर सके और ज्ञान को लोकमंगल से जोड़ सके।
ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह कर्म में उतरे। महाकाली केवल विनाश की प्रतीक नहीं, बल्कि जड़ता, भय, आलस्य और संदेह को तोड़कर आगे बढ़ने की निर्णायक शक्ति हैं। कठिनाइयों के बावजूद प्रयास करना क्रियाशक्ति का परिचय है। जीवन इच्छा, ज्ञान और कर्म का सीधा-सादा क्रम नहीं है। परिवार, कार्यक्षेत्र, संबंधों और व्यक्तिगत आकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। दुर्गा इन शक्तियों के समन्वय और परिस्थिति के अनुरूप उचित निर्णय लेने का सामर्थ्य प्रदान करती हैं।

शारदीय नवरात्रि का संदेश है कि देवी की आराधना भीतर के जागरण का माध्यम बने। इच्छा को संकल्प, ज्ञान को दिशा और कर्म को साधना बनाकर जीवन में संतुलन स्थापित करें। यही महाशक्ति की चतुर्मूर्ति का जीवन सूत्र है।

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