Pavitri Symbol Of Purity In Religious Rituals And Food
पवित्री पहन लो
नवभारतटाइम्स.कॉम•
भारतीय धार्मिक परंपराओं में पवित्रता का अक्सर उल्लेख होता है। इस समय नवरात्रि का समय भी चल रहा है। पूजा-पाठ, यज्ञ, हवन और पितृ तर्पण जैसे अनुष्ठानों में कुश घास से बनी अंगूठी धारण करने की परंपरा है, जिसे ‘ पवित्री ’ या ‘कुशमुद्रिका’ कहते हैं। इस शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ‘पवित्र’ शब्द से हुई है। इसका अर्थ है- शुद्ध या शुद्ध करने वाला। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कुश पवित्र है और इसे धारण करना अनुष्ठान के दौरान तन व मन की शुद्धता के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। कहीं-कहीं सोने की अंगूठी को भी पवित्री कहा जाता है। इस शब्द का एक और प्रचलित रूप है, जो भोजन परोसने से जुड़ा है। भोजन परोसने के बाद थाली में घी डाला जाता है। इसे भी ‘पवित्री’ कहते हैं। वजह है, घी को भारतीय परंपरा में शुद्धता, सात्विकता और शुभता से जोड़ा गया है। इसलिए कह सकते हैं कि भोजन में घी डालना केवल स्वाद बढ़ाने का माध्यम नहीं, उसे सम्मानपूर्वक परोसने और शुभ मानने की सांस्कृतिक भावना से भी जुड़ा है। हालांकि देसी घी के लिए पवित्री शब्द का प्रचलन पूरे देश में नहीं है।