शब्दों की मर्यादा

नवभारतटाइम्स.कॉम•
word limit in politics impact of leaders sharp comments on society
राजनीति में अधिकतम उपलब्धियां हासिल करने की होड़ में नेता शब्दों की मर्यादा और मानवता को ताक पर रखकर विपक्षी नेताओं पर तीखी टिप्पणियां कर रहे हैं। ऐसे बयान सभ्य समाज के लिए न अनुकरणीय हैं, न हितकारी। नेताओं को समझना चाहिए कि उनकी भाषा का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। इसलिए उन्हें शब्दों पर संयम रखते हुए ऐसी आलोचना करनी चाहिए, जिससे राजनीतिक विरोध भी व्यक्त हो और समाज में स्वस्थ संवाद तथा सकारात्मक संदेश का प्रसार भी हो।

संदीप आर्य, ईमेल से

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