मॉरीशस की मंत्री ज्योति जीतून: भारत-मॉरीशस-अफ्रीका में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार से बड़ा बदलाव

NewsPoint
Navbharat Times
मॉरीशस की वित्तीय सेवा एवं आर्थिक योजना मंत्री ज्योति जीतून ने कहा है कि भारत और मॉरीशस के बीच, और ब्रिक्स देशों व अफ्रीकी महाद्वीप के साथ भी, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार शुरू होने से संबंधित अर्थव्यवस्थाओं में बड़ा बदलाव आ सकता है। उन्होंने जोर दिया कि मौजूदा वैश्विक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों में डॉलर जैसी मजबूत विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम करना विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर सकता है। न्यूज एजेंसी को दिए एक खास इंटरव्यू में जीतून ने कहा कि भू-राजनीति और वैश्विक दक्षिण को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का मुद्दा और भी अहम हो गया है। उन्होंने बताया कि मॉरीशस बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पिछले साल भारतीय रुपए और मॉरीशस रुपए के लिए एक क्लीयरिंग व्यवस्था बनाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। मंत्री ने कहा, “अगर हम हार्ड करेंसी की जगह अपनी स्थानीय मुद्राओं में सीधे व्यापार कर सकें, तो इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को फायदा होगा। मॉरीशस बैंक और आरबीआई इस व्यवस्था को लागू करने पर काम कर रहे हैं। इससे विदेशी मुद्राओं पर हमारी निर्भरता कम होगी और मौजूदा वैश्विक हालात में हमारी अर्थव्यवस्थाओं को काफी मदद मिलेगी।”

ज्योति जीतून ने भारत की आर्थिक तरक्की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह मॉरीशस के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा, “जब यह सफर शुरू हुआ था, तब भारत दुनिया की 10वीं या 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। आज भारत चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और जल्द ही तीसरे स्थान पर पहुंचने की उम्मीद है। भारत की विकास गाथा अपने आप में एक कहानी कहती है।” उन्होंने बताया कि व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौते (CEPA) के लागू होने के बाद भारत और मॉरीशस के बीच व्यापार बढ़ा है, हालांकि इसमें अभी और विस्तार की काफी गुंजाइश है। मॉरीशस की कम आबादी (लगभग 12 लाख) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश का घरेलू बाजार छोटा है, लेकिन व्यापार लगातार बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, सबसे बड़ा मौका भारत-मॉरीशस-अफ्रीका आर्थिक गलियारे में है। उन्होंने बताया कि मॉरीशस अफ्रीकी संघ, सदर्न अफ्रीकन डेवलपमेंट कम्युनिटी (SADC) और कॉमन मार्केट फॉर ईस्टर्न एंड सदर्न अफ्रीका (COMESA) का सदस्य है। ऐसे में मॉरीशस भारत और अफ्रीका के बीच व्यापार और निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बन सकता है। उन्होंने कहा, “अफ्रीका तेजी से आर्थिक विकास कर रहा है और निवेश आकर्षित कर रहा है। इसकी बड़ी आबादी इसे भारत की तरह एक विशाल बाजार बनाती है। हम भारत और अफ्रीका को और अधिक जोड़ने और मॉरीशस को एक बड़े व्यापारिक मंच के रूप में विकसित करने पर काम कर रहे हैं।”
हाल ही में दोहरा कराधान बचाव समझौते (DTAA प्रोटोकॉल) के अनुमोदन पर बोलते हुए जीतून ने कहा कि इससे निवेशकों को अधिक निश्चितता और विश्वास मिलेगा। उन्होंने कहा, “अब हमें पूरा विश्वास है कि हम मॉरीशस-भारत कर संधि और आर्थिक संबंधों को लेकर निवेशकों को स्थिरता, पूर्वानुमेयता और भरोसा प्रदान कर सकते हैं।” भारत और मॉरीशस के बीच ऊर्जा सहयोग पर टिप्पणी करते हुए मंत्री ने कहा कि पिछले हफ्ते केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की मॉरीशस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौते किए। उन्होंने बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ मॉरीशस के बीच ईंधन आपूर्ति संबंधी बिक्री और खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। ज्योति जीतून ने कहा, “हम इसे सिर्फ व्यापारिक संबंध नहीं, बल्कि एक व्यापक आर्थिक साझेदारी के रूप में देखते हैं, जो मॉरीशस को महत्वपूर्ण ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करती है।” उन्होंने कहा कि ईरान से जुड़े संघर्ष और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण दुनिया भर में ईंधन आपूर्ति और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे समय में भारत के साथ यह सरकारी स्तर का समझौता मॉरीशस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंत्री ने कहा, “वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हुई हैं और लागत बढ़ी है। ऐसे माहौल में इंडियन ऑयल के माध्यम से लागू यह सरकारी व्यवस्था मॉरीशस-भारत संबंधों का एक अत्यंत मूल्यवान और रणनीतिक हिस्सा है।”

स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का विचार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम करता है। जब देश अपनी ही मुद्रा में व्यापार करते हैं, तो उन्हें विदेशी मुद्रा भंडार की चिंता कम होती है और विनिमय दर के उतार-चढ़ाव का जोखिम भी कम हो जाता है। यह विकासशील देशों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है, जिनके पास अक्सर सीमित विदेशी मुद्रा भंडार होता है। मॉरीशस और भारत के बीच इस दिशा में उठाए जा रहे कदम एक बड़ी पहल है। मॉरीशस बैंक और आरबीआई के बीच समझौता ज्ञापन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह व्यवस्था लागू होने पर दोनों देशों के बीच व्यापार और आसान हो जाएगा।

भारत की आर्थिक तरक्की की बात करें तो यह वाकई काबिले तारीफ है। मंत्री ज्योति जीतून ने सही कहा कि भारत ने पिछले कुछ दशकों में जबरदस्त छलांग लगाई है। एक समय जो भारत दुनिया की 10वीं या 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, आज वह चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और उनकी नीतियों का नतीजा है। ‘विकसित भारत 2047’ का विजन भारत को और भी ऊंचाइयों पर ले जाने का लक्ष्य रखता है। मॉरीशस जैसी छोटी अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह एक प्रेरणा है कि कैसे एक देश अपनी क्षमता का उपयोग करके तेजी से विकास कर सकता है।

भारत और मॉरीशस के बीच CEPA लागू होने से व्यापार में वृद्धि हुई है। यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में मदद करता है। हालांकि, मंत्री ने यह भी कहा कि अभी इसमें और विस्तार की काफी संभावनाएं हैं। इसका मतलब है कि दोनों देश मिलकर और भी बहुत कुछ कर सकते हैं। मॉरीशस की छोटी आबादी के बावजूद, उसका व्यापार लगातार बढ़ रहा है। यह दर्शाता है कि मॉरीशस एक सक्रिय व्यापारिक भागीदार है।

मॉरीशस का भारत और अफ्रीका के बीच एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बनना एक बड़ी रणनीतिक पहल है। मॉरीशस अफ्रीकी संघ, SADC और COMESA जैसे महत्वपूर्ण अफ्रीकी संगठनों का सदस्य है। इसका मतलब है कि मॉरीशस के पास अफ्रीका के बड़े बाजारों तक पहुंचने की अच्छी पहुंच है। भारत के लिए, मॉरीशस अफ्रीका के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए एक पुल का काम कर सकता है। अफ्रीका एक तेजी से बढ़ता हुआ महाद्वीप है और इसमें निवेश के बड़े अवसर हैं। मॉरीशस इस अवसर का लाभ उठाकर भारत और अफ्रीका के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत कर सकता है।

दोहरा कराधान बचाव समझौते (DTAA प्रोटोकॉल) का अनुमोदन निवेशकों के लिए एक अच्छी खबर है। यह समझौता सुनिश्चित करता है कि एक ही आय पर दो बार कर न लगे। इससे निवेशकों को अधिक सुरक्षा और विश्वास मिलता है, जो किसी भी देश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है। मॉरीशस और भारत के बीच इस समझौते से दोनों देशों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

ऊर्जा सहयोग के क्षेत्र में भारत और मॉरीशस के बीच हुए समझौते भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ मॉरीशस के बीच ईंधन आपूर्ति संबंधी समझौते मॉरीशस को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करते हैं। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में, जहां ईंधन की आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, यह समझौता मॉरीशस के लिए एक बड़ी राहत है। यह भारत के साथ एक मजबूत साझेदारी का प्रतीक है, जो न केवल व्यापारिक है बल्कि रणनीतिक भी है। यह दिखाता है कि कैसे दो देश मिलकर एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं और वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।

रेकमेंडेड खबरें