गणेश प्रतिमा पर अंडे फेंकने के बाद आचार्य प्रमोद कृष्णम का बयान, हिंदू आस्था पर हमले को बताया फैशन

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Navbharat Times
हरिद्वार, 24 अगस्त। कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने महाराष्ट्र में गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान अंडे फेंके जाने की घटना पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं की आस्था पर हमला करना आजकल फैशन बन गया है। आचार्य कृष्णम ने कहा कि हिंदू दुनिया की सबसे उदार प्रजाति हैं, फिर भी महाराष्ट्र में गणपति और दुर्गा के जुलूसों को बाधित किया जा रहा है। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से ऐसे अपराध करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि यह एक ऐसा दौर आ गया है जब हिंदुओं को गाली देना और उनकी आस्था को ठेस पहुंचाना आम बात हो गई है। उन्होंने कहा, “हिंदुओं की आस्था पर हमला करना एक फैशन सा बन गया है। जो उठता है, वो हिंदुओं को अशब्द बोलता है, उनकी आस्था को खंडित करने का काम करता है। अगर दुनिया में सबसे कमजोर और सबसे उदार मनुष्य की कोई प्रजाति है तो वह हिंदू है। यह जो Maharashtra में हो रहा है, कभी गणपति के जुलूस को बाधित किया जाता है तो कभी दुर्गा के जुलूस को रोका जाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि जो घटनाएं पहले पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में हो रही थीं, अब वही महाराष्ट्र में भी होने लगी हैं। आचार्य कृष्णम ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि वे एक सनातन प्रेमी और राष्ट्रभक्त मुख्यमंत्री हैं, जिनकी ओर करोड़ों हिंदू उम्मीद से देख रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया जो इस तरह के अपराध कर रहे हैं।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस बात पर भी दुख व्यक्त किया कि सावन के महीने में भी धार्मिक स्थलों के आसपास मांसाहारी दावतें चल रही हैं और धार्मिक स्थलों पर मांसाहार परोसा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह दिल दुखाने वाली बात है। उन्होंने सरकार और लोगों से अपील की कि वे धार्मिक स्थानों का सम्मान करें और धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखें।

उन्होंने भारत सरकार और राज्य सरकारों से निवेदन किया कि जहां-जहां हिंदुओं की आस्था के केंद्र हैं, उन स्थानों पर मांसाहार पर प्रतिबंध लगाया जाए। आचार्य कृष्णम ने कहा, “मैं इन सभी मांसाहारी आसुरी शक्तियों से अपील करना चाहता हूं कि आप कुछ भी खाइए, India स्वतंत्र है, लेकिन कम से कम धार्मिक स्थानों का सम्मान करिए, धार्मिक भावनाओं का सम्मान करिए।”

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिंदुओं की मान्यताएं, परंपराएं और आस्था को ठेस पहुंचाने का काम हर जगह हो रहा है, चाहे वह महाराष्ट्र हो या अयोध्या। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा दौर है जहां हिंदुओं को गाली देना फैशन बन गया है।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि हिंदुओं को कमजोर और उदार समझना गलत है। उन्होंने कहा कि उनकी सहनशीलता का मतलब यह नहीं है कि उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ किया जाए। उन्होंने कहा कि गणपति और दुर्गा जैसे पवित्र त्योहारों के जुलूसों को बाधित करना हिंदू समाज के लिए अपमानजनक है।

उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से उम्मीद जताई कि वे इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करेंगे और दोषियों को सजा दिलाएंगे। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि यह एक बड़ी समस्या का संकेत है जिस पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे तत्वों पर लगाम कसनी चाहिए जो धार्मिक सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

आचार्य कृष्णम ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी भी धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने विशेष रूप से धार्मिक स्थलों के आसपास मांसाहार पर प्रतिबंध लगाने की मांग को दोहराया ताकि धार्मिक भावनाओं का आदर हो सके।

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