सूरत पुलिस ने अंतरराज्यीय एमडी ड्रग्स नेटवर्क का भंडाफोड़ किया, 30 लाख की ड्रग्स के साथ दो गिरफ्तार

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सूरत, 24 अगस्त। सूरत क्राइम ब्रांच ने 'नो ड्रग्स इन सूरत सिटी' अभियान के तहत एक बड़े अंतरराज्यीय एमडी ड्रग्स नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने करीब एक किलो एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग्स के साथ मुंबई की रहने वाली मानसी अब्दुल सैयद और उसके साथी सोहेल सुलेमान शेख को गिरफ्तार किया है। बरामद 977 ग्राम एमडी की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 30 लाख रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। इस नेटवर्क की मुख्य सरगना मानसी, जो कभी मलेशिया एयरलाइंस में एयर होस्टेस रह चुकी है, को पुलिस ने पहले भी मध्य प्रदेश में ड्रग्स तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था।

सूरत क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली थी कि एक महिला बड़ौदा रेलवे स्टेशन के आसपास एमडी ड्रग्स की सप्लाई करने वाली है। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया। मानसी और सोहेल मुंबई से एक किराए की कार में बड़ौदा पहुंचे। वहां उन्होंने करीब एक किलो एमडी ड्रग्स की डिलीवरी ली और फिर एक्सप्रेसवे के रास्ते सूरत होते हुए मुंबई की ओर रवाना हो गए। सूरत रूरल पुलिस और एसओजी टीम ने मिलकर ऐना टोल नाके के पास उनकी कार को रोका और तलाशी ली। इसी तलाशी में पुलिस को कार से 977 ग्राम एमडी ड्रग्स मिली, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस की पूछताछ में मानसी के ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े होने का पुराना इतिहास सामने आया है। मानसी के पिता एयर इंडिया में टेक्नीशियन थे और मानसी खुद मलेशिया एयरलाइंस में एयर होस्टेस के तौर पर काम कर चुकी है। पुलिस का कहना है कि उसने करीब 8 से 10 देशों की यात्रा भी की है। जांच में यह भी पता चला है कि मानसी साल 2021 से पहले मध्य प्रदेश के ड्रग्स नेटवर्क से जुड़ी हुई थी। साल 2021 में इंदौर क्राइम ब्रांच ने उसे 100 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। उस समय वह कथित तौर पर बच्चों के डायपर के जरिए ड्रग्स की तस्करी करती थी। करीब चार साल जेल में रहने के बाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर मानसी मुंबई आ गई थी। पुलिस का दावा है कि पिछले डेढ़ साल से वह मुंबई में ड्रग्स पैडलर्स को नशीले पदार्थ सप्लाई कर रही थी। सूरत में हुई इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।

इस मामले में गिरफ्तार दूसरा आरोपी सोहेल सुलेमान शेख सिर्फ 20 साल का है और मानसी का पड़ोसी बताया जा रहा है। मानसी के परिवार ने सोहेल के पालन-पोषण और आर्थिक मदद में भी अहम भूमिका निभाई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, मानसी पुलिस चेकिंग से बचने के लिए सोहेल को कभी पति तो कभी भाई बताकर अपने साथ रखती थी। इसका मकसद पुलिस को यह दिखाना था कि वे एक परिवार हैं और चेकिंग के दौरान शक से बचा जा सके। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सोहेल की भूमिका सिर्फ ड्रग्स की खेप पहुंचाने तक सीमित थी या वह इस नेटवर्क के दूसरे कामों में भी शामिल था।

सूरत पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस दोनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है। इस जांच का मुख्य मकसद ड्रग्स की सप्लाई चेन का पता लगाना और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान करना है। पुलिस आरोपियों के पास से मिले मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का तकनीकी विश्लेषण कर रही है। इसके जरिए मुंबई में सक्रिय ड्रग्स पैडलर्स और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। जरूरत पड़ने पर मुंबई क्राइम ब्रांच से भी संपर्क किया जाएगा।

यह पूरा मामला सूरत पुलिस के 'नो ड्रग्स इन सूरत सिटी' अभियान की सफलता को दर्शाता है। पुलिस लगातार नशे के खिलाफ अभियान चला रही है और इस तरह के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ कर रही है। मानसी जैसी आरोपी, जो पहले भी पकड़ी जा चुकी है और फिर से इस धंधे में शामिल हो गई, यह दिखाती है कि ड्रग्स का जाल कितना गहरा है। उसकी पिछली तस्करी का तरीका, बच्चों के डायपर का इस्तेमाल, यह बताता है कि तस्कर कितने शातिर हो सकते हैं। चार साल जेल में रहने के बाद जमानत पर बाहर आकर फिर से ड्रग्स के धंधे में उतरना, यह दर्शाता है कि ऐसे अपराधी सुधरने का नाम नहीं लेते।

सोहेल जैसे युवा का इस धंधे में शामिल होना भी चिंता का विषय है। यह दिखाता है कि कैसे युवा भी ड्रग्स के जाल में फंस सकते हैं या फिर लालच में आकर ऐसे अपराधों में शामिल हो जाते हैं। मानसी का उसे अपने साथ रखना और अलग-अलग रिश्ते बताना, यह उसकी चालाकी को दिखाता है। वह पुलिस को चकमा देने के लिए हर संभव तरीका अपना रही थी।

पुलिस की यह कार्रवाई बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न केवल ड्रग्स की खेप को रोकती है, बल्कि पूरे सप्लाई चेन को तोड़ने की दिशा में एक कदम है। मोबाइल फोन और अन्य उपकरणों का विश्लेषण करके पुलिस उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है जो इस धंधे के पीछे हैं। यह एक लंबी और जटिल प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन पुलिस का दृढ़ संकल्प इस नेटवर्क को खत्म करने में मदद करेगा। मुंबई क्राइम ब्रांच के साथ मिलकर काम करने से इस मामले की तह तक पहुंचने में और आसानी होगी।

यह घटना सूरत और आसपास के इलाकों में नशे के बढ़ते खतरे को भी उजागर करती है। पुलिस की सतर्कता और जनता से मिलने वाली सूचनाएं ऐसे अभियानों को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। 'नो ड्रग्स इन सूरत सिटी' जैसे अभियान लोगों को जागरूक करने और उन्हें पुलिस का सहयोग करने के लिए प्रेरित करते हैं। इस तरह की गिरफ्तारियां समाज को ड्रग्स के दुष्परिणामों के प्रति सचेत करती हैं और युवाओं को इस दलदल से दूर रहने की प्रेरणा देती हैं। पुलिस का यह प्रयास सराहनीय है और उम्मीद है कि वे इस पूरे ड्रग्स नेटवर्क का सफाया करने में सफल होंगे।

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