कच्ची चीनी आयातकों के लिए समयसीमा में बदलाव: डीजीएफटी ने जारी की नई अधिसूचना
कच्ची चीनी आयातकों के लिए समयसीमा में बदलाव: डीजीएफटी ने जारी की नई अधिसूचना
NewsPoint•
नई दिल्ली, 25 अगस्त: सरकार ने शुल्क-मुक्त आयातित कच्ची चीनी के प्रसंस्करण और बिक्री की समयसीमा में बड़ा बदलाव किया है। अब आयातकों को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से सिर्फ दो महीने के अंदर कच्ची चीनी को सफेद या रिफाइंड चीनी में बदलकर घरेलू बाजार में बेचना होगा। यह फैसला त्योहारी सीजन से पहले चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को काबू में रखने के लिए लिया गया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने अगस्त की शुरुआत में टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) योजना के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी थी, जिसमें यह संशोधन किया गया है।
पहले के नियमों के मुताबिक, टीआरक्यू के तहत आयात की गई कच्ची चीनी को 31 अक्टूबर तक प्रोसेस करके घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य था। लेकिन अब इस निश्चित समयसीमा को हटा दिया गया है। आयातकों को बिल ऑफ एंट्री जमा करने के दिन से लेकर अगले दो महीनों के भीतर ही इस चीनी को प्रोसेस करके बेचना होगा। सरकार ने 20 अगस्त को ही घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए, त्योहारी सीजन से पहले 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की इजाजत दी थी।इस नए बदलाव से आयातकों को थोड़ी राहत मिली है, क्योंकि उन्हें अब एक निश्चित तारीख का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वे अपनी सुविधा के अनुसार चीनी को प्रोसेस करके बाजार में उतार सकेंगे। हालांकि, 20 अगस्त की अधिसूचना में बताए गए अन्य नियम और शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने यह भी छूट दी थी कि 20 अगस्त तक एसआईओएन ई-52 के तहत जारी 'एडवांस ऑथराइजेशन' को टीआरक्यू स्कीम में एक बार बदला जा सकता है। इसका मतलब है कि जिन आयातकों ने पहले से ही एडवांस ऑथराइजेशन ले रखा था, वे भी इस नई योजना का लाभ उठा सकते हैं।
इस योजना के तहत आयात की गई कच्ची चीनी से तैयार की गई रिफाइंड चीनी पर भी यह नियम लागू होगा। आयात के समय जीएसटी में जो छूट दी गई थी, उसका भुगतान और अन्य निर्धारित शर्तों का पालन करना अभी भी जरूरी होगा। सरकार का यह कदम अगस्त से नवंबर के बीच आने वाले त्योहारी सीजन को ध्यान में रखकर उठाया गया है। इस दौरान शादियों और अन्य उत्सवों के कारण चीनी की मांग काफी बढ़ जाती है। मांग बढ़ने से अक्सर चीनी की कीमतें भी आसमान छूने लगती हैं।
सरकार का मकसद है कि इस शुल्क-मुक्त आयात और समयसीमा में बदलाव से बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और चीनी की कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी नहीं होगी। यह कदम महंगाई को नियंत्रित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है। आयातकों को अब अपनी लॉजिस्टिक्स और प्रोसेसिंग की योजना इस दो महीने की अवधि के हिसाब से बनानी होगी। यह बदलाव आयातकों के लिए एक नई चुनौती और अवसर दोनों लेकर आया है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि वे समय पर चीनी को प्रोसेस करके बाजार में उपलब्ध करा सकें।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह योजना केवल कच्ची चीनी के आयात पर लागू होती है, जिसे बाद में सफेद या रिफाइंड चीनी में बदला जाएगा। पहले से तैयार रिफाइंड चीनी के आयात पर यह नियम लागू नहीं होगा। सरकार लगातार बाजार की स्थितियों पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी ऐसे कदम उठा सकती है। इस फैसले से चीनी उद्योग में भी हलचल देखने को मिल सकती है, क्योंकि आयातकों को अपनी उत्पादन और वितरण योजनाओं को तेजी से समायोजित करना होगा। कुल मिलाकर, यह सरकार का एक सक्रिय कदम है जो त्योहारी सीजन के दौरान आम आदमी को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।