पश्चिम बंगाल में सीएए नागरिकता आवेदनों पर जल्द सुनवाई, 23,000 को सर्टिफिकेट जारी
पश्चिम बंगाल में सीएए नागरिकता आवेदनों पर जल्द सुनवाई, 23,000 को सर्टिफिकेट जारी
NewsPoint•
कोलकाता, 24 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (सीएए) के तहत नागरिकता के लिए आवेदनों पर जल्द सुनवाई पूरी होने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अब तक 2.30 लाख आवेदकों में से 23,000 लोगों को नागरिकता प्रमाण पत्र जारी कर चुकी है। इसके साथ ही, उन्होंने 'पश्चिम बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026' को राज्यपाल द्वारा मंजूरी मिलने की भी जानकारी दी, जो पुलिस पर हमला करने वालों की गिरफ्तारी और सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करेगा। अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 'अन्नपूर्णा योजना' के तहत महिलाओं को भत्ता न मिलने के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि राज्य सरकार 1.46 करोड़ से अधिक योग्य महिलाओं के खातों में सीधे आर्थिक मदद भेज चुकी है, जिसमें लगभग 19 लाख मुस्लिम परिवार भी शामिल हैं।
राज्य सचिवालय 'नबन्ना' में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने सीएए के संबंध में कहा, "हम सीएए के लिए सुनवाई जल्द पूरी करेंगे। सभी योग्य शरणार्थियों को, जिनमें नए आवेदक और अभी पेंडिंग पड़े 2,07,000 आवेदन शामिल हैं, सुनवाई जल्दी पूरी होने के बाद भारतीय नागरिकता के आधिकारिक सर्टिफिकेट दिए जाएंगे।" उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में जिला मजिस्ट्रेटों को आवश्यक निर्देश भेज दिए गए हैं। इसका मतलब है कि जो भी शरणार्थी सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन कर चुके हैं और जिनके आवेदन अभी लंबित हैं, उन्हें जल्द ही भारतीय नागरिकता मिल जाएगी।इसके अलावा, अधिकारी ने 'पश्चिम बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026' के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि गवर्नर आर.एन. रवि ने इस बिल को मंजूरी दे दी है। यह बिल खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं या पुलिस पर हमला करते हैं। इस बिल के तहत, ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया जा सकेगा और उनसे हुए नुकसान की भरपाई भी करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस कानून का एक हिस्सा आज से पश्चिम बंगाल में लागू हो गया है। अधिकारी ने जोर देकर कहा, "सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर किसी को भी रियायत नहीं दी जाएगी। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर मुआवजे के तौर पर तीन गुना रकम वसूली जाएगी, वह भी ब्याज के साथ। पुलिस पर हमला होने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।" यह एक सख्त कदम है ताकि लोग सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान करें और कानून व्यवस्था बनाए रखें।
सुवेंदु अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उन आरोपों का जोरदार खंडन किया जिनमें उन्होंने कहा था कि महिलाओं को 'अन्नपूर्णा योजना' का भत्ता नहीं दिया जा रहा है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार पहले ही 1.46 करोड़ से अधिक योग्य महिलाओं के बैंक खातों में सीधे आर्थिक मदद भेज चुकी है। उन्होंने दावा किया कि यह पैसा बिना किसी राजनीतिक या धार्मिक भेदभाव के बांटा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस योजना के तहत लगभग 19 लाख मुस्लिम परिवारों के खातों में भी पैसे पहुँच चुके हैं, जो धर्मनिरपेक्षता का प्रमाण है।
ममता बनर्जी ने दिन में सोशल मीडिया पर लाइव आकर आरोप लगाया था कि विधानसभा चुनाव से पहले भत्ता दोगुना करने का वादा करने के बाद, अब सरकार तरह-तरह की शर्तें और पेचीदगियाँ लगाकर महिलाओं को इस योजना से वंचित कर रही है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अधिकारी ने कहा, "हमारी सरकार किसी धर्म के साथ भेदभाव नहीं करती है।" उन्होंने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसी बातें उन लोगों को शोभा नहीं देतीं जिन्होंने राजनीतिक कारणों से लोगों को धोखा दिया है।
'अन्नपूर्णा योजना' के तहत योग्य और अयोग्य लोगों की सूची पर उठ रहे सवालों पर अधिकारी ने कहा कि सरकारी नियमों के अनुसार जांच-पड़ताल की जा रही है। उन्होंने बताया कि लगभग 4.5 लाख महिलाओं ने अपने आवेदनों को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं और हर शिकायत की बारीकी से जांच की जा रही है, साथ ही उसी के अनुसार कार्रवाई भी की जा रही है। इसका मतलब है कि सरकार सभी शिकायतों को गंभीरता से ले रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंचे।