सूरत पुलिस ने चीनी साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े आरोपी को 33 करोड़ से अधिक की ठगी के मामले में किया गिरफ्तार

NewsPoint
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सूरत साइबर क्राइम सेल ने एक बड़े चीनी साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए लवली उर्फ समीर उर्फ रिव अरोड़ा नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह आरोपी बैंक खातों का इंतजाम करके ठगी की रकम को इस नेटवर्क तक पहुंचाने में मदद करता था। पुलिस की जांच में उसके 34 बैंक खातों से 33.14 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी का खुलासा हुआ है। यह आरोपी मैनपावर सप्लायर है और चेन्नई का रहने वाला है। पुलिस ने उसे निवेश के नाम पर हुई साइबर धोखाधड़ी के एक मामले की जांच के दौरान पकड़ा।

यह पूरा मामला 14 नवंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 के बीच हुई कथित निवेश धोखाधड़ी से जुड़ा है। शिकायतकर्ता को शेयर बाजार में डॉलर निवेश पर भारी मुनाफे का लालच दिया गया था। उसे एक फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट का लिंक भेजा गया। आरोप है कि शिकायतकर्ता ने उस वेबसाइट और कस्टमर सर्विस के जरिए बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में 1.52 करोड़ रुपए से ज्यादा जमा कर दिए। लेकिन जब उसने पैसे निकालने की कोशिश की, तो उसे अनुमति नहीं मिली। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
पुलिस का कहना है कि यह गिरफ्तार आरोपी पहले से गिरफ्तार हो चुके लोगों से बैंक खाते लेता था। हर बार पैसे ट्रांसफर करने पर उसे 3 प्रतिशत कमीशन मिलता था। इसके बाद वह इन्हीं खातों को 3.5 प्रतिशत कमीशन पर दुबई में बैठे एक फरार आरोपी को दे देता था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, दुबई में बैठा यह आरोपी एक चीनी साइबर गिरोह के साथ मिलकर काम कर रहा था। यह गिरोह साइबर ठगी से कमाए पैसों को यूएसडीटी (USDT) नाम की एक डिजिटल करेंसी के जरिए इधर-उधर करता था।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर जांच के दौरान, इस आरोपी से जुड़े 34 बैंक खातों की पड़ताल की गई। इन खातों के जरिए 14 राज्यों से कुल 113 शिकायतें सामने आईं। इन सभी शिकायतों में 33.14 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी का आरोप है। सबसे ज्यादा शिकायतें कर्नाटक से 34 दर्ज हुईं। इसके अलावा महाराष्ट्र से 11, गुजरात और तमिलनाडु से 10-10 शिकायतें मिलीं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, बिहार और असम से 6-6 मामले सामने आए। दिल्ली से भी 6 शिकायतें दर्ज हुईं।

जांच में एक और बड़ा घोटाला भी सामने आया है, जो डेटा एंट्री जॉब से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, इस आरोपी ने मुंबई, इंदौर, पटना, अहमदाबाद, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों में कॉल सेंटर चलाए थे। उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से नौकरी ढूंढ रहे लोगों का डेटा खरीदा था। हर एक व्यक्ति के डेटा के लिए 2 से 8 रुपए खर्च करके उसने 33 लाख से ज्यादा लोगों का डेटा इकट्ठा किया था।

ये टेली-कॉलर्स लोगों को घर बैठे डेटा एंट्री जॉब का लालच देते थे। शुरुआत में उनसे 5,000 रुपए जमा कराए जाते थे। बाद में, काम में कथित तौर पर गलतियां बताकर पैसे वापस नहीं किए जाते थे। पुलिस का दावा है कि इस तरीके से 750 से ज्यादा लोगों से 35 लाख रुपए से ज्यादा की ठगी की गई।

पुलिस ने आरोपी के पास से एक लैपटॉप बरामद किया है। इस लैपटॉप में 33,88,646 ग्राहकों का डेटा और डेटा एंट्री जॉब से जुड़े 266 एग्रीमेंट मिले हैं। जांच में यह भी पता चला कि आरोपी ने 'केयर कंपास' नाम का एक फर्जी सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन भी बनाया था। इसके अलावा, पुलिस ने आरोपी के पास से 14 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप, 4 सिम कार्ड और 57 सिम कार्ड कवर भी जब्त किए हैं।

पुलिस के मुताबिक, यह आरोपी करीब 12 बार दुबई की यात्रा कर चुका है। पहले उसके पास दुबई की नागरिकता भी थी। उस पर सूरत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक और निवेश धोखाधड़ी मामले में भी शामिल होने का आरोप है। उस मामले में 15.44 लाख रुपए की ठगी हुई थी। उस मामले में पहले ही मिनेश कुमार सोलंकी, अनिल गुप्ता, विकास सिंह भदौरिया और रियाज उर्फ शोएब नाम के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े बाकी लोगों की भी तलाश की जा रही है।

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