पुलवामा में बादाम की बंपर हार्वेस्टिंग: किसानों के चेहरे खिले, उत्पादन में आई जबरदस्त उछाल
पुलवामा में बादाम की बंपर हार्वेस्टिंग: किसानों के चेहरे खिले, उत्पादन में आई जबरदस्त उछाल
NewsPoint•
पुलवामा में इस साल बादाम की बंपर पैदावार हुई है, जिससे किसानों के चेहरे पर खुशी लौट आई है. पिछले कुछ सालों से लगातार कम उत्पादन से परेशान किसानों को इस साल मौसम का साथ मिला है. पुलवामा के मुख्य बागवानी अधिकारी रियाज अहमद शाह ने बताया कि किसानों की मेहनत, समय पर मिली सरकारी सलाह और उन्नत कीटनाशकों के सही इस्तेमाल से पैदावार में भारी उछाल आया है. इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए प्रशासन ने 100 कनाल जमीन पर एक खास बाग लगाया है और 5 हेक्टेयर नर्सरी में विदेशों से मंगवाए गए उच्च गुणवत्ता वाले पौधे लगाए हैं. अधिकारियों को उम्मीद है कि यह कदम कश्मीर के बादाम उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा.
पुलवामा के किसान आज भी बादाम तोड़ने के लिए अपनी पुरानी पारंपरिक विधियों का इस्तेमाल करते हैं. वे खुद पेड़ों पर चढ़कर लंबी लकड़ियों से शाखाओं को पीटते हैं, जिससे बादाम नीचे गिरते हैं. पेड़ों के नीचे तिरपाल बिछा दिया जाता है ताकि बादाम खराब न हों. इसके बाद बादामों से हरा छिलका अलग किया जाता है. एक समय था जब पूरा परिवार मिलकर यह काम हाथों से करता था, लेकिन अब समय बचाने के लिए कई मालिक मशीनों का इस्तेमाल करने लगे हैं. अंत में, छिलके वाले बादामों को धूप में सुखाया जाता है, जिससे वे कुरकुरे और स्वादिष्ट हो जाते हैं.यहां के कागजी बादाम अपनी पतली परत के लिए मशहूर हैं, जिन्हें आप सिर्फ हाथों से आसानी से फोड़ सकते हैं. वहीं, कश्मीरी मामरा बादाम अपने छोटे आकार, मुड़ी हुई बनावट, भरपूर तेल और स्वाद के कारण प्रीमियम श्रेणी में आता है.
रियाज अहमद शाह ने कहा, “इस साल मौसम ने हमारा भरपूर साथ दिया है. किसानों की दिन-रात की मेहनत, सही समय पर दी गई विभागीय कृषि सलाह और उन्नत कीटनाशकों एवं उर्वरकों के सटीक इस्तेमाल से पैदावार में यह जबरदस्त उछाल आया है.”
जिला प्रशासन और बागवानी निदेशालय ने मिलकर एक अनोखी पहल की है. उन्होंने 100 कनाल जमीन पर एक विशेष बाग स्थापित किया है. साथ ही, नर्सरी की 5 हेक्टेयर भूमि पर विदेशों से उच्च गुणवत्ता वाले पौधे मंगवाकर लगाए गए हैं. अधिकारियों का मानना है कि यह कदम कश्मीर के बादाम उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा.
बादाम तोड़ने का तरीका भी काफी दिलचस्प है. किसान पेड़ों पर चढ़कर लंबी और लचीली लकड़ियों से शाखाओं को सावधानी से पीटते हैं. इससे बादाम नीचे गिरते हैं. पेड़ों के नीचे जमीन पर एक बड़ा तिरपाल बिछाया जाता है. यह तिरपाल बादामों को मिट्टी में खराब होने से बचाता है और उन्हें सुरक्षित रखता है.
बादामों से उनका हरा छिलका अलग किया जाता है. पहले यह काम पूरा परिवार मिलकर आंगन में बैठकर करता था. लेकिन अब समय बचाने के लिए कई बागान मालिक आधुनिक मशीनों का सहारा लेने लगे हैं.
आखिर में, छिलके वाले बादामों को खुली धूप में सूखने के लिए बिछा दिया जाता है. इससे उनके अंदर की गिरी एकदम कुरकुरी और स्वादिष्ट हो जाती है.
पुलवामा के कागजी बादाम अपनी कागज जैसी पतली परत के लिए बहुत मशहूर हैं. इन्हें आप बिना किसी मशीन के सिर्फ अपने हाथों से आसानी से फोड़ सकते हैं.
कश्मीरी मामरा बादाम अपने छोटे आकार, खास मुड़ी हुई बनावट, भरपूर प्राकृतिक तेल और स्वाद के कारण उच्च प्रीमियम श्रेणी में गिना जाता है. यह बादाम अपनी खासियतों के चलते काफी पसंद किया जाता है. इस साल की बंपर पैदावार से किसानों में खुशी की लहर है और वे भविष्य को लेकर आशान्वित हैं.