लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 राज्यसभा में पेश: त्वरित जांच और कठोर दंड का प्रावधान

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2026
नई दिल्ली, 30 जुलाई। राज्यसभा में गुरुवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया जाएगा। लोकसभा से पारित इस महत्वपूर्ण विधेयक पर राज्यसभा में चर्चा और इसे पारित कराने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इस विधेयक को सदन में रखेंगे। इस संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य परीक्षाओं में होने वाली धांधली को रोकना और दोषियों को कड़ी सजा देना है।

यह विधेयक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए लाया गया है। हाल के वर्षों में प्रश्न-पत्र लीक होने और परीक्षा से जुड़ी कई गड़बड़ियों के मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं को देखते हुए, सरकार ने परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए यह कड़ा कदम उठाया है। इस विधेयक के तहत, दोषियों को अब पहले से कहीं ज्यादा सजा मिलेगी। इसमें कम से कम 5 साल की जेल की सजा का प्रावधान है, जिसे बढ़ाकर 10 साल तक किया जा सकता है। साथ ही, जुर्माने की राशि को भी 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये तक कर दिया गया है।
राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन को बताया कि लोकसभा से पारित विधेयक की एक प्रति मंगलवार दोपहर करीब 3:30 बजे राज्यसभा सदस्यों के पोर्टल पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध करा दी गई थी। सदस्यों को विधेयक का अध्ययन करने और संशोधन प्रस्ताव तैयार करने के लिए कम समय मिला था। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, एक विशेष व्यवस्था की गई है। जिन सदस्यों को इस विधेयक में कोई संशोधन प्रस्ताव देना था, उन्हें गुरुवार दोपहर तक अपना प्रस्ताव सचिवालय को सौंपने का मौका दिया गया था। यह समय इसलिए तय किया गया ताकि सचिवालय सभी प्रस्तावों की जांच कर सके और उनकी सूची तैयार करके समय पर सदस्यों को वितरित कर सके।

इस विधेयक में त्वरित जांच, विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के जरिए से तुरंत सुनवाई, अपीलों का समय पर निपटारा और कठोर दंड जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसका मतलब है कि अगर कोई परीक्षा में गड़बड़ी करता पकड़ा जाता है, तो उस पर तेजी से कार्रवाई होगी और उसे जल्दी सजा मिलेगी। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करेगी कि ऐसे अपराधों पर सख्ती से रोक लगे और लोक परीक्षाओं की पवित्रता बनी रहे।

सभापति ने यह भी बताया कि कार्य संचालन नियमों के नियम 123 के तहत इस विधेयक पर राज्यसभा में विचार और पारित कराने के लिए छूट प्रदान की गई है। इसके लिए एक अनुपूरक कार्यसूची भी जारी की गई है। यह दर्शाता है कि सरकार इस विधेयक को जल्द से जल्द पारित कराना चाहती है ताकि परीक्षाओं में होने वाली धांधली पर अंकुश लगाया जा सके।

यह संशोधन विधेयक परीक्षा प्रणाली में अधिक जवाबदेही तय करेगा। यह उन लोगों के लिए एक बड़ा सबक होगा जो परीक्षाओं को हल्के में लेते हैं या उनमें धांधली करने की कोशिश करते हैं। इस विधेयक के पारित होने से छात्रों का परीक्षाओं पर भरोसा बढ़ेगा और वे बिना किसी डर के अपनी मेहनत पर परीक्षा दे पाएंगे। यह देश के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि परीक्षाएं ही युवाओं के भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती हैं।

इस विधेयक के माध्यम से सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर बहुत गंभीर है। किसी भी तरह की धांधली या अनुचित साधनों का प्रयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह संशोधन उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो परीक्षाओं की पवित्रता को भंग करने का प्रयास करते हैं। यह सुनिश्चित करेगा कि केवल योग्य और मेहनती छात्र ही आगे बढ़ें।

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