अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया, 85 टेस्ट खेले

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टीम इंडिया के अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने 30 जुलाई को इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक भावुक वीडियो शेयर कर बताया कि उन्हें लगता है कि यह इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायर होने का सही समय है. रहाणे ने अपने करियर में 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले.

रहाणे ने अपने संन्यास की घोषणा करते हुए कहा, “जिंदगी की सच्चाई यह है कि हर चीज की एक शुरुआत होती है और हर चीज का एक अंत होता है. जब समय आता है, तो आपको बस उसका सम्मान करना है और आगे बढ़ना है. मैंने हमेशा अपनी बैटिंग में टाइमिंग पर भरोसा किया है और मैंने हमेशा इसकी अहमियत को समझा है. आज मुझे लगता है कि मेरे लिए आगे बढ़ने और इंटरनेशनल क्रिकेट और सभी फॉर्मेट से रिटायरमेंट की घोषणा करने का सही समय है.” उन्होंने यह भी बताया कि कैसे वे महाराष्ट्र के ठाणे जिले के डोंबिवली से निकलकर एक क्रिकेटर बने. रहाणे ने कहा कि उन्होंने खेल के लिए अपना सब कुछ दिया और हमेशा ईमानदारी से खेला. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि खेल के साथ उनका सफर यहीं खत्म नहीं हुआ है.
अपने इस लंबे सफर के लिए रहाणे ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई), मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन, हर आईपीएल फ्रेंचाइजी, अपने परिवार और खासकर अपनी पत्नी राधिका का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा कि ये सभी लोग हमेशा उनके समर्थन में खड़े रहे.

अपने इंटरनेशनल करियर में अजिंक्य रहाणे ने 85 टेस्ट मैचों में 38 की औसत से 5077 रन बनाए. इसमें 12 शतक और 26 अर्धशतक शामिल हैं. वनडे क्रिकेट में उन्होंने 90 मैच खेले, जिसमें 35 की औसत से 2,962 रन बनाए. वनडे में उनके बल्ले से 3 शतक और 24 अर्धशतक निकले. टी20 इंटरनेशनल में रहाणे ने 20 मैच खेले और 113 के स्ट्राइक रेट से 375 रन बनाए.

घरेलू क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में भी रहाणे का प्रदर्शन शानदार रहा. उन्होंने आईपीएल में छह अलग-अलग टीमों की तरफ से खेलते हुए कुल 212 मैच खेले. रहाणे अपनी शानदार फील्डिंग और मुश्किल परिस्थितियों में टीम को संभालने की क्षमता के लिए जाने जाते थे. उनकी टेस्ट क्रिकेट में कप्तानी भी काफी सराही गई.

रहाणे का यह फैसला कई क्रिकेट प्रेमियों के लिए चौंकाने वाला हो सकता है, लेकिन उन्होंने खुद कहा कि यह उनके लिए सही समय है. उन्होंने खेल के प्रति अपने समर्पण और ईमानदारी को हमेशा बनाए रखा. उनके इस फैसले से भारतीय क्रिकेट में एक युग का अंत हो गया है.

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