द्वारका पुलिस की बड़ी कार्रवाई: अदालत से फरार आरोपी ब्रिजेश दास गिरफ्तार, न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने का अभियान जारी

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Navbharat Times
नई दिल्ली, 11 जून: द्वारका जिला पुलिस की एंटी जेल बेल एवं प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर्स सेल ने अदालत से फरार चल रहे एक आरोपी ब्रिजेश दास को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी साल 2023 के एक मामले में हुई है, जिसमें आरोपी पर कार्यवाही से बचने और लंबे समय से फरार रहने का आरोप था। द्वारका कोर्ट ने 21 मई 2026 को ब्रिजेश दास को अपराधी घोषित किया था। यह गिरफ्तारी द्वारका जिला पुलिस द्वारा फरार अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है।

पुलिस को 7 जून 2026 को गुप्त सूचना मिली कि आरोपी ब्रिजेश दास, जो पहले बापरोला क्षेत्र के नांगली विस्तार में रहता था, अब तिलक नगर स्थित एक पार्किंग में काम कर रहा है। इस सूचना की पुष्टि होने के बाद, पुलिस की एक टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद, आरोपी को द्वारका नॉर्थ थाने लाया गया और विधिक प्रक्रिया पूरी की गई। पुलिस के अनुसार, आरोपी को बीएनएनएस की धारा 35(1)(डी) के तहत हिरासत में लिया गया है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान 51 वर्षीय ब्रिजेश दास के रूप में हुई है, जो नांगली विस्तार, बापरोला, नजफगढ़, दिल्ली का रहने वाला है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, ब्रिजेश दास का कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। द्वारका जिला पुलिस ने बताया कि फरार और अदालत से घोषित अपराधियों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

यह गिरफ्तारी एक बड़े अभियान का हिस्सा है, जिसमें पुलिस फरार अपराधियों को पकड़ने के लिए तकनीकी और मानवीय सूचना का इस्तेमाल कर रही है। इंस्पेक्टर हरीश कुमार के नेतृत्व में एंटी पीओ सेल की टीम ने आरोपी की तलाश में कड़ी मेहनत की और आखिरकार उसे पकड़ने में सफलता हासिल की।

इसी बीच, दिल्ली पुलिस की साउथ डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह फर्जी ऑनलाइन हेलीकॉप्टर और ट्रैवल बुकिंग वेबसाइटों के जरिए देशभर के लोगों को ठग रहा था। आरोपियों ने सरकारी या अधिकृत ट्रैवल पोर्टल जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइटें बनाई थीं और लोगों को यात्रा बुकिंग का लालच देकर उनसे पैसे ऐंठते थे।

इस मामले में साइबर थाना, साउथ जिला में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। पुलिस ने बैंक ट्रांजैक्शन, डिजिटल पेमेंट चैनल, डोमेन रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड, ईमेल अकाउंट, आईपी लॉग और होस्टिंग सर्विस से मिले तकनीकी डेटा का बारीकी से विश्लेषण किया। इस तकनीकी जांच और सर्विलांस के माध्यम से पुलिस ने बिहार के नालंदा से ओमप्रकाश कुमार और रोहित कुमार नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह गिरोह लोगों को ठगने के लिए नई-नई तरकीबें अपना रहा था, लेकिन पुलिस की सक्रियता से इनका भंडाफोड़ हो गया।

पुलिस का कहना है कि इस तरह के गिरोहों पर नकेल कसना बहुत जरूरी है, ताकि आम लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार न हों। यह गिरोह लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें ठगता था, खासकर जब लोग यात्रा की योजना बनाते थे। फर्जी वेबसाइटें इतनी विश्वसनीय लगती थीं कि कोई भी आसानी से धोखा खा सकता था।

पुलिस ने इन आरोपियों के पास से ठगी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण और अन्य सामग्री भी बरामद की है। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की साइबर सेल की क्षमता को दर्शाती है, जो लगातार ऑनलाइन अपराधों से निपटने के लिए प्रयासरत है। इस तरह की गिरफ्तारियां आम जनता में विश्वास पैदा करती हैं कि पुलिस उनकी सुरक्षा के लिए तत्पर है।