मंगोलिया में फुट एंड माउथ डिजीज का प्रकोप: 1230 से अधिक पशुओं की मौत, Sat 1 स्ट्रेन का खतरा
मंगोलिया में फुट-एंड-माउथ डिजीज का प्रकोप: 1230 से अधिक पशुओं की मौत, SAT-1 स्ट्रेन का खतरा
NewsPoint•
मंगोलिया के बायन-उलगी और खोव्द प्रांतों में पशुओं में फुट-एंड-माउथ डिजीज का प्रकोप बढ़ गया है। इस बीमारी से अब तक 1,230 से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि यह एसएटी-1 स्ट्रेन का संक्रमण है, जो पहली बार मंगोलिया में पाया गया है। इन प्रांतों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
उलानबटोर, 10 जून . मंगोलिया के पश्चिमी इलाकों में पशुओं में फैल रही फुट-एंड-माउथ डिजीज (एफएमडी) की बीमारी ने चिंता बढ़ा दी है. बायन-उलगी और खोव्द प्रांतों में इस बीमारी से अब तक 1,230 से ज्यादा पशुओं की मौत हो चुकी है. देश की जनरल अथॉरिटी फॉर वेटरिनरी सर्विसेज (जीएवीएस) ने मंगलवार को यह जानकारी दी. यह एक बहुत ही खतरनाक और तेजी से फैलने वाली बीमारी है जो गाय, भेड़, बकरी और सूअर जैसे खुर वाले जानवरों को अपनी चपेट में लेती है.
अधिकारियों ने बताया कि इन प्रांतों में एफएमडी वायरस का एसएटी-1 स्ट्रेन पाया गया है. यह पहली बार मंगोलिया में देखा गया है. जीएवीएस के मुताबिक, एसएटी-1 स्ट्रेन बहुत जानलेवा है. यह हवा से, गंदे वाहनों और औजारों से, इंसानों से और जंगली जानवरों से भी बहुत जल्दी फैल सकता है. इस खतरे को देखते हुए बायन-उलगी और खोव्द प्रांतों को फिलहाल अनिश्चित काल के लिए हाई अलर्ट पर रखा गया है. यह बीमारी मई के आखिर में पहली बार सामने आई थी.चिंता की बात यह है कि देश के बाकी छह प्रांतों में भी एफएमडी वायरस के ओ स्ट्रेन का संक्रमण पाया गया है. यह वही स्ट्रेन है जो दुनिया भर में एफएमडी के ज्यादातर मामलों के लिए जिम्मेदार है. मंगोलिया की अर्थव्यवस्था पशुपालन पर बहुत निर्भर करती है. वहां के लोग सदियों से घुमंतू जीवनशैली जीते आए हैं, जिसमें पशुओं का खास महत्व है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार, 2025 के अंत तक देश में करीब 5.81 करोड़ पशुधन थे. यह पिछले साल के मुकाबले 0.8 प्रतिशत ज्यादा है.
एफएमडी एक गंभीर बीमारी है जो बहुत तेजी से फैलती है. इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और पशुपालन पर बहुत पड़ता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी सीमाओं के पार भी फैल सकती है. इसलिए, इस पर काबू पाने के लिए कड़ी निगरानी और तुरंत कार्रवाई करना बहुत जरूरी है. जिन पशुओं का टीकाकरण नहीं हुआ है, उन्हें एफएमडी का खतरा सबसे ज्यादा है. यह बीमारी पशुओं के लिए एक बड़ा खतरा है और इससे निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.