जानें कार्तिक माह की नवमी और दशमी तिथि का महत्व, पंचांग में खास जानकारी

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Navbharat Times
नई दिल्ली, 2 नवंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का बहुत महत्व है। इसमें सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की स्थिति का ध्यान रखा जाता है। किसी भी शुभ कार्य, यात्रा, या पूजा-पाठ से पहले पंचांग देखना जरूरी होता है। आज हम आपको कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि के बारे में बताएंगे, जो सोमवार को 1:10 बजे से शुरू होकर मंगलवार को 11:54 बजे तक रहेगी। इसके बाद 4 नवंबर को दशमी तिथि आएगी।

इस मंगलवार सुबह 6:37 बजे सूर्योदय होगा, और शाम 5:43 बजे सूर्यास्त होगा। चंद्रोदय रात 12:54 बजे होगा जबकि चंद्रास्त अगले दिन 2:03 बजे होगा। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में होते हैं, तब महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं। स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव हैं और स्वामी राहु हैं। इससे लोगों में पुरानी समस्याओं से निकलने और स्वतंत्रता से कार्य करने की भावना मजबूत होती है।
मंगलवार को सुबह 9:53 बजे तक 'शुक्ल योग' रहेगा, इसके बाद 'ब्रह्म योग' शुरू होगा। शुक्ल योग 27 नित्य योगों में से 24वां योग है। संस्कृत में 'शुक्ल' का अर्थ होता है 'सफेद', 'चमकदार', 'उज्ज्वल' या 'शुद्ध'। इस योग की देवी पार्वती हैं। इसी दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से 12:32 बजे तक रहेगा। यह समय बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी अशुभ प्रभाव अपने आप समाप्त हो जाते हैं।

मंगलवार रात 1:03 बजे से 2:38 बजे तक अमृतकाल रहेगा। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक बहुत ही शुभ और सकारात्मक समय है। इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना बढ़ जाती है। नया व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और यात्रा के लिए यह समय सबसे अच्छा है।

हालांकि, मंगलवार को राहुकाल दोपहर 2:57 बजे से 4:20 बजे तक रहेगा। इसे शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। राहुकाल का समय एक दिन के सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच का समय होता है, जिसे आठ हिस्सों में बांटा जाता है। इस अवधि में कोई नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए, जबकि चल रहे कार्यों को जारी रखा जा सकता है।

साल के उस समय को यमगंड काल कहा जाता है, जो मंगलवार को सुबह 9:23 बजे से 10:47 बजे तक रहेगा। यह समय यमराज से जुड़ा है और इसे नए कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। इस दौरान स्वास्थ्य और दीर्घायु से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस समय यात्रा और पैसे के लेन-देन से बचना चाहिए।

दोपहर 12:10 बजे से 1:33 बजे तक गुलिक काल रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहा जाता है। इस अवधि में किए गए कार्यों के नकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में नया कार्य शुरू करने से बचना चाहिए लेकिन पुरानी गतिविधियों को जारी रख सकते हैं। इस काल में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना अच्छा माना जाता है।

इस दिन सूर्य तुला राशि में रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य तुला राशि में होता है, तो इसे 'नीच स्थिति' कहा जाता है। सूर्य अग्नि तत्व का प्रतीक है, जबकि तुला वायु तत्व से जुड़ी होती है। इसका असर यह होता है कि लोगों का आत्मबल और ऊर्जा थोड़ी कमजोर हो जाती है, जिससे निर्णय लेना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

मंगलवार को चंद्र देव सिंह राशि में रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा का सिंह राशि में रहना व्यक्ति की मानसिक स्थिति और जीवन पर खास असर डालता है। सिंह राशि का स्वामी सूर्य देव हैं, जो ऊर्जा, अधिकार और नेतृत्व का प्रतीक है। इसके कारण व्यक्ति का आत्मविश्वास काफी बढ़ता है।

मंगलवार को दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल का मतलब है कि उस दिशा में यात्रा करना अशुभ होता है। इसका ध्यान रखना आवश्यक है।

पंचांग के इस विस्तृत विवरण ने हमें यह बताया कि हम किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को करने से पहले पंचांग को देखना क्यों महत्वपूर्ण है। यह न केवल हमारे धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है, बल्कि हमारे दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों को भी प्रभावित करता है। उचित समय पर किए गए कार्य से सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। इसलिए, अपनी योजनाओं को सही समय पर बनाना और सही मार्गदर्शन लेना जरूरी है।

इसी के साथ, हम सभी पाठकों को यह सुझाव देना चाहेंगे कि वे इन महत्वपूर्ण समयों का ध्यान रखते हुए अपने कार्यों को योजनाबद्ध तरीके से करें। इस तरह न सिर्फ वे अपने जीवन में सकारात्मकता ला सकेंगे, बल्कि मुश्किल हालात से भी निकल सकेंगे। जीवन के हर पहलू में सही समय पर कदम उठाना हमेशा फायदेमंद साबित होता है।

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