काजल ढोचक ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में जीता सिल्वर मेडल, ओलंपिक 2028 के लिए हैं आश्वस्त

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नई दिल्ली, 1 नवंबर (आईएएनएस)। भारत की युवा पहलवान काजल ढोचक ने कजाकिस्तान में आयोजित वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में ऐतिहासिक सिल्वर मेडल जीता है। काजल, जो केवल 18 वर्ष की हैं, ने 76 किग्रा भार वर्ग के फाइनल में यूक्रेन की अनास्तासिया अल्पियेवा से मुकाबला किया। काजल ने इस सिल्वर मेडल से अपनी उम्मीदें और बढ़ा ली हैं और उन्हें विश्वास है कि वह लॉस एंजेलेस में 2028 के ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करेंगी। उन्होंने कहा कि इस प्रतियोगिता में उन्हें जिन पहलवानों का सामना करना पड़ा, उनमें से कई को वह पहले भी हरा चुकी हैं।

काजल ने फाइनल मुकाबले के बारे में बताते हुए कहा कि वह दोनों राउंड में आगे थीं लेकिन अंत में उन्हें 6-8 से हार मिली। उन्होंने मैच के अंत में रक्षात्मक खेलने का खेद व्यक्त किया। काजल ने कहा, "स्कोर 4-4 था और मैं लगभग जीत ही रही थी। अगर मैं आखिरी पलों में रक्षात्मक होने के बजाय अटैकिंग खेलती, तो गोल्ड मेरा होता।"
वर्ल्ड चैंपियनशिप में उनके प्रदर्शन से काजल का आत्मविश्वास बढ़ा है। उनका भार वर्ग ओलंपिक में शामिल है और अगले वर्ष ओलंपिक क्वालिफिकेशन की प्रतियोगिताएं भी होने वाली हैं। काजल ने कहा, "मुझे खुद पर 100 प्रतिशत भरोसा है कि मैं ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लूंगी।"

काजल ने बताया कि उन्होंने पहले भी फाइनल में अपने प्रतिद्वंद्वी को हराया है। वह जानती हैं कि उन्हें अपनी तकनीकों में थोड़ा सुधार करने की आवश्यकता है। कोच ने उन्हें सलाह दी है कि उन्हें डिफेंस पर काम करना होगा। काजल ने कहा, "आखिरी पलों में हमें रक्षात्मक नहीं होना चाहिए। शुरुआत में हम जिस तरह अटैकिंग खेल दिखाते हैं, उसे अंत तक बनाए रखना जरूरी है।"

इससे पहले, काजल एशियन गेम्स के ट्रायल में कुछ समय पहले बाहर हो गई थीं। उस समय वह बहुत निराश हुई थीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी शुरू कर दी। काजल ने कहा, "एशियन गेम्स के ट्रायल के फाइनल में, जब कुछ ही सेकंड बचे थे, मुझे लगा कि मेरा चयन हो गया है। लेकिन आखिरी पलों में परिस्थिति पलट गई। मुझे हार का एहसास करने में कुछ समय लगा।"

अब, काजल की नजरें आगे की प्रतियोगिताओं पर हैं। वह कॉमनवेल्थ रेसलिंग चैंपियनशिप के ट्रायल, सीनियर नेशनल चैंपियनशिप और प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) में भाग लेने की तैयारी कर रही हैं। काजल ने कहा, "जब सब कुछ कुश्ती के लिए ही हो रहा है, तो ब्रेक लेने का क्या मतलब है? अब कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप के ट्रायल आ रहे हैं, मैं उनमें हिस्सा लूंगी। इसके बाद सीनियर नेशनल चैंपियनशिप और फिर पीडब्ल्यूएल में भी भाग लूंगी।"

अपने सफर में काजल ने संघर्ष का सामना किया है लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका लक्ष्य है लगातार मेहनत करना और अपने खेल में सुधार करना। उनका यह प्रदर्शन आने वाले समय में अन्य युवा पहलवानों के लिए प्रेरणा बन सकता है। विडंबना यह है कि अब जब वह कामयाबी की ओर बढ़ रही हैं, तब उनके सामने नई चुनौतियाँ भी हैं।

काजल का यह सिल्वर मेडल उनकी मेहनत और संघर्ष का फल है। उन्होंने साबित किया है कि विश्वास और मेहनत से हर मुश्किल का सामना किया जा सकता है।

काजल ढोचक का नाम अब उन खिलाड़ियों में शामिल हो गया है जिन्होंने भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया है। उनका समर्थक वर्ग उन्हें देखकर प्रेरित होगा और भविष्य में उनकी और भी बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद कर सकता है।

काजल का सफर अभी खत्म नहीं हुआ। उन्होंने आगे की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तैयारी कर रखी है। उनकी मेहनत और लगन निश्चित रूप से उन्हें और ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

अंत में, काजल का यह संदेश है कि कठिनाइयों से कभी हार नहीं माननी चाहिए। मेहनत का फल मीठा होता है और डर के आगे जीत है।

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