जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के सांसद बिमोल अकोइजाम पर यौन उत्पीड़न के आरोप, दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की

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Navbharat Times
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजाम पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की। एफआईआर में उक्त सांसद का नाम शामिल है और यह कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता के तहत की गई। यह जांच उस वक्त की जा रही है जब मई में कम से कम 11 महिला छात्रों ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी।

इस मामले की पहली शिकायत मई 2023 में आई थी जब कई महिला छात्रों ने आरोप लगाया था कि अकोइजाम ने उन्हें विभिन्न बहानों से अपने आवास पर बुलाकर उनका यौन उत्पीड़न करने का प्रयास किया। कुछ ने यह भी कहा कि कक्षाओं में उनके द्वारा अश्लील और अनुचित टिप्पणियां की गईं। जेएनयू प्रशासन ने इन शिकायतों की गंभीरता को समझते हुए एक आंतरिक समिति का गठन किया और जांच के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया।
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने इस मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि "जब हम मां शैलपुत्री की पूजा कर रहे हैं, मैं आपके सामने इस देश की बेटियों से संबंधित एक बहुत ही गंभीर मुद्दा ला रही हूं।" उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या उनकी "पितृसत्ता को नष्ट करो" वाली टिप्पणी एक महज राजनीतिक बयानबाजी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी इस गंभीर मुद्दे पर चुप है, और यह एक किस्म का पाखंड है।

स्वराज ने कहा, "जब जिम्मेदारी की बात आती है, तो नारीवाद उनके लिए एक हैशटैग बनकर रह जाता है।" उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के प्रमुख नेताओं जैसे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं कहा। उनका मानना है कि इस चुप्पी का मतलब है कि वे अकोइजाम के कार्यों का समर्थन कर रहे हैं।

बर्खास्तगी के बाद, भाजपा ने कांग्रेस की आलोचना की है और सवाल उठाया है कि क्या महिलाओं का सम्मान केवल एक नारा है या यह कांग्रेस की नीति नहीं है। इसके साथ ही, इस मामले में दिल्ली पुलिस ने आगे बढ़ते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे मामले की गहराई से जांच करेंगे ताकि जो कुछ भी सही है, वह सामने आ सके।

इस घटना ने राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है और यह दिखा रहा है कि राजनीतिक दल जब महिला सुरक्षा और नारीवाद की बात करते हैं, तब उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को भी निभाना चाहिए। भाजपा के दावे के अनुसार, कांग्रेस पर दबाव डालने की कोशिश की जा रही है, जबकि वह अपने पार्टी के सांसद के यौन उत्पीड़न के आरोपों पर कुछ नहीं बोल रही है।

इस पूरी स्थिति ने न केवल जेएनयू के शिक्षण वातावरण को प्रभावित किया है, बल्कि यह महिलाओं के खिलाफ हो रहे यौन उत्पीड़न के मामलों पर व्यापक चर्चा का विषय भी बना है। अब देखना है कि दिल्ली पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और कांग्रेस इस पर कब तक चुप्पी साधे रखती है।

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