उमेश सिंह कुशवाहा ने लालू यादव की चारवाहा विद्यालय योजना की आलोचना की, एनडीए सरकार के शिक्षा सुधारों पर जोर
उमेश सिंह कुशवाहा ने लालू यादव की चारवाहा विद्यालय योजना की आलोचना की, एनडीए सरकार के शिक्षा सुधारों पर जोर
NewsPoint•
पटना, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने बुधवार को राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की 'चारवाहा विद्यालय' की योजना की कड़ी आलोचना की। उन्होंने यह भी बताया कि एनडीए सरकार बिहार में उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने पर जोर दे रही है। दरभंगा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि सरकार का इरादा है कि हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज और पॉलिटेक्निक संस्थान स्थापित हों। इससे युवाओं को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मुहैया होंगे।
कुशवाहा ने महागठबंधन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव के समय में शिक्षा को लेकर जो दृष्टिकोण था, वह एनडीए सरकार के तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा पर ध्यान देने के मुकाबले बिल्कुल भिन्न था। उन्होंने 'चारवाहा विद्यालय' की विचारधारा पर तंज कसते हुए कहा कि यह राजद के शिक्षा रिकॉर्ड की कमजोरियों को दर्शाता है। कुशवाहा ने यह भी कहा, "मतदाता शिक्षा और विकास जैसे मुद्दों के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं।" उन्होंने मतदाताओं से दरभंगा के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में एनडीए समर्थित उम्मीदवारों को वोट देने की अपील की। कुशवाहा ने इस बात पर भरोसा जताया कि एनडीए द्वारा समर्थन प्राप्त उम्मीदवार घनश्याम राय और सर्वेश कुमार भारी अंतर से जीतेंगे। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से इन दोनों उम्मीदवारों के लिए सक्रिय तौर पर प्रचार करने का आग्रह किया।
कुशवाहा की ये टिप्पणी बिहार विधानसभा (एमएलसी) चुनाव के प्रचार के दौरान आई। उन्होंने इस मौके का उपयोग एनडीए के शिक्षा एजेंडे को उजागर करने और राजद के शासन के दौरान किए गए कार्यों की आलोचना करने के लिए किया। चुनावी प्रचार बुधवार शाम 5 बजे समाप्त हुआ और मतदान 23 अक्टूबर को होगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। इस बार मुख्य मुकाबला एनडीए, राजद, कांग्रेस और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवारों के बीच होगा।
इस चुनाव के दौरान, कुशवाहा ने कहा कि बिहार में शिक्षा के बुनियादी ढांचे की दिशा में एनडीए सरकार का कदम काफी महत्वपूर्ण है। कुशवाहा के अनुसार, इससे युवा पीढ़ी को अपनी क्षमताओं को विकसित करने का अवसर मिलेगा। पाठकों के लिए यह समझना जरूरी है कि चुनावी राजनीति में शिक्षा का मुद्दा कितना महत्वपूर्ण है और कैसे यह भविष्य बनाने में मदद कर सकता है।