संबित पात्रा ने खड़गे की विवादित टिप्पणी पर कांग्रेस पर साधा निशाना, राहुल गांधी की भूमिका पर उठाए सवाल
संबित पात्रा ने खड़गे की विवादित टिप्पणी पर कांग्रेस पर साधा निशाना, राहुल गांधी की भूमिका पर उठाए सवाल
NewsPoint•
कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में ऐसी बातें कहीं, जिसने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद संबित पात्रा को प्रतिक्रिया देने पर मजबूर कर दिया। यह घटना पटना में हुई जब खड़गे पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने उनकी टिप्पणियों पर सवाल उठाए। खड़गे ने कहा कि वह मोदी को सत्ता से हटाएंगे और कांग्रेस वापसी करेगी। इस पर एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने कहा, "मोदी कहीं नहीं जा रहे हैं।"
संबित पात्रा ने कहा कि खड़गे की बैठक के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि कांग्रेस के भीतर ही राहुल गांधी को लेकर असमंजस है। एक कार्यकर्ता ने कहा, "हमारे नॉन-फंक्शनिंग अध्यक्ष राहुल गांधी हमेशा छुट्टियों पर रहते हैं, ऐसे में कांग्रेस चुनाव कैसे जीत पाएगी?" उन्होंने यह भी कहा कि खड़गे की टिप्पणियों में कुंठा की झलक थी। उनका कहना था कि खड़गे की यह भाषा शोभा नहीं देती। "ये भाषा मल्लिकार्जुन खड़गे की भाषा नहीं है। ये राहुल गांधी की भाषा है।"संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी की जब से कांग्रेस की कमान संभाली है, पार्टी का लगातार पतन हो रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि कार्यकर्ता खुद जानते हैं कि राहुल गांधी सत्ता में आने में असफल रहे हैं। उन्होंने कहा, "ये कुंठा दिख रही है। एक नवंबर को व्यापारियों के व्यापार को चोट पहुंचाने की कोशिश करने वाले कुंठा में डूबे हैं।"
भाजपा सांसद ने यह भी कहा कि खड़गे की टिप्पणियाँ उनकी उम्र के लिहाज से उचित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि खड़गे को राजनीति में इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए। इससे यह भी पता चलता है कि खुद कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में अपने नेता के प्रति असंतोष है।
संबित पात्रा की दलील यह है कि राहुल गांधी की नेतृत्व शैली ने कांग्रेस को कमजोर किया है। वह यह मानते हैं कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस को अपनी दिशा पर ध्यान देना चाहिए और नए विचार अपनाने चाहिए।
कुल मिलाकर, खड़गे की टिप्पणियाँ और संबित पात्रा की प्रतिक्रिया ने कांग्रेस और भाजपा के बीच एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे क्या होता है और नेता खुद अपनी रणनीतियों में क्या बदलाव करते हैं।