राजस्थान में मानसून सक्रिय: पाली में तेज बारिश, 17 सितंबर तक अलर्ट जारी
राजस्थान में मानसून सक्रिय: पाली में तेज बारिश, 17 सितंबर तक अलर्ट जारी
NewsPoint•
राजस्थान में एक बार फिर मानसून ने ज़ोर पकड़ लिया है। बुधवार दोपहर पाली में अचानक मौसम बदला और तेज़ बारिश शुरू हो गई। इस बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली, लेकिन कई जगहों पर सड़कों पर पानी भर गया। मौसम विभाग जयपुर ने 17 सितंबर तक पूरे प्रदेश में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इससे पहले, उदयपुर संभाग में 13 सितंबर की रात से 14 सितंबर की शाम तक भारी बारिश हुई। डूंगरपुर और बांसवाड़ा में 4 इंच से ज़्यादा पानी बरसा, जिससे कई इलाकों में जलभराव हुआ और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
यह बारिश बंगाल की खाड़ी से आए एक लो-प्रेशर सिस्टम की वजह से हो रही है। यह सिस्टम फिलहाल दक्षिणी राजस्थान के साथ-साथ गुजरात और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में सक्रिय है। इसी सिस्टम के असर से दक्षिणी राजस्थान के कई इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग इस सिस्टम पर लगातार नज़र रखे हुए है।मौसम विभाग के अनुसार, मानसून ट्रफ (मानसून की वह रेखा जो बारिश का मुख्य क्षेत्र बनाती है) अब दक्षिण की ओर खिसक गई है। यह गुजरात के नलिया से शुरू होकर लो-प्रेशर सिस्टम से होते हुए राजगढ़, दमोह, पेंड्रा रोड, राउरकेला और दीघा से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक जा रही है। मानसून ट्रफ के दक्षिण की ओर जाने और लो-प्रेशर सिस्टम के सक्रिय होने से राजस्थान के दक्षिणी हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ गई हैं। फिलहाल, यह लो-प्रेशर सिस्टम गुजरात और दक्षिणी राजस्थान की सीमा के पास बना हुआ है।
अरब सागर से लगातार नमी मिलने के कारण राजस्थान में अगले दो दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की उम्मीद है। दक्षिणी राजस्थान के कई जिलों में तेज़ बारिश हो सकती है, जबकि प्रदेश के बाकी हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। पाली में बुधवार को हुई तेज़ बारिश भी इसी मौसमी बदलाव का हिस्सा थी। आने वाले दिनों में दक्षिणी राजस्थान के साथ-साथ प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी बारिश देखने को मिल सकती है।
मौसम विभाग ने 17 सितंबर तक प्रदेश में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसलिए, लोगों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय मौसम की ताज़ा जानकारी पर ध्यान दें। जिन इलाकों में भारी बारिश हो रही है, वहां के लोगों को निचले इलाकों, जलभराव वाली सड़कों और नदी-नालों के आसपास जाने से बचने की अपील की गई है।
यह लो-प्रेशर सिस्टम एक तरह का मौसमी सिस्टम है जो हवा के कम दबाव वाले क्षेत्र के कारण बनता है। जब हवा का दबाव कम होता है, तो आसपास की हवा तेज़ी से उस ओर खिंचती है, जिससे बादल बनते हैं और बारिश होती है। बंगाल की खाड़ी से आया यह सिस्टम अपने साथ नमी लेकर आया है, जो राजस्थान में बारिश का कारण बन रहा है।
मानसून ट्रफ एक ऐसी रेखा है जो वायुमंडल में उस क्षेत्र को दर्शाती है जहाँ हवा का दबाव कम होता है और अक्सर बारिश होती है। जब यह ट्रफ दक्षिण की ओर खिसकती है, तो इसका मतलब है कि बारिश का मुख्य क्षेत्र भी दक्षिण की ओर चला जाता है। राजस्थान के दक्षिणी हिस्सों में बारिश बढ़ने का यही कारण है।
अरब सागर से नमी मिलने का मतलब है कि समुद्र से पानी भाप बनकर हवा में मिल रहा है। यह नमी जब राजस्थान तक पहुँचती है, तो यह बारिश कराने में मदद करती है। इस तरह, लो-प्रेशर सिस्टम और अरब सागर से मिलने वाली नमी मिलकर राजस्थान में बारिश का माहौल बना रहे हैं।
मौसम विभाग लगातार इन सिस्टमों पर नज़र रखता है ताकि लोगों को समय पर चेतावनी दी जा सके और किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके। इस बार का अलर्ट विशेष रूप से दक्षिणी राजस्थान के लिए है, जहाँ भारी बारिश की संभावना है। इसलिए, इन इलाकों के लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की ज़रूरत है।