विश्वकर्मा पूजा 2026: जानें कब है, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
विश्वकर्मा पूजा 2026: जानें कब है, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
NewsPoint•
नई दिल्ली, 16 सितंबर. इस साल विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी. यह पर्व कन्या संक्रांति के अवसर पर आता है और इसे विश्वकर्मा जयंती के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन भगवान विश्वकर्मा, जिन्हें देवताओं का शिल्पकार और दिव्य वास्तुकार माना जाता है, की पूजा की जाती है. निर्माण, वास्तुकला, शिल्प और तकनीकी कौशल से जुड़े लोग इस दिन अपने काम के औजारों, मशीनों और उपकरणों की पूजा करते हैं. ऐसा माना जाता है कि इससे काम में सफलता, तरक्की और समृद्धि मिलती है. पूजा के लिए सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक का समय शुभ है, जबकि अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का निर्माणकर्ता कहा गया है. वे शिल्प, निर्माण और वास्तुकला के देवता हैं. इसीलिए इस दिन सिर्फ भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या मूर्ति की ही नहीं, बल्कि काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों और मशीनों की भी पूजा की जाती है. चाहे वह फैक्ट्री की मशीन हो, दुकान का सामान हो, वर्कशॉप के औजार हों या फिर कोई गाड़ी, इन सबको साफ करके पूजा में शामिल किया जाता है. यह पर्व मेहनत, हुनर और अपने काम के प्रति सम्मान को भी दर्शाता है.विश्वकर्मा पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें. सबसे पहले अपने पूजा स्थल और कार्यस्थल को अच्छी तरह से साफ करें. मशीनों, औजारों और बाकी सभी उपकरणों को भी साफ-सुथरा कर लें. इसके बाद, एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें. पूजा शुरू करने के लिए दीपक जलाएं. भगवान विश्वकर्मा को रोली, अक्षत (चावल), चंदन, फूल, माला, फल, मिठाई और नैवेद्य (भोग) चढ़ाएं. आप चाहें तो गंगाजल से पूजा स्थल को शुद्ध कर सकते हैं.
इसके बाद, भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए मंत्रों का जाप करें. अपने औजारों और मशीनों पर भी रोली-अक्षत लगाएं और फूल चढ़ाएं. पूजा के अंत में भगवान की आरती करें. भगवान को भोग लगाएं और प्रसाद सभी में बांट दें. कुछ लोग इस खास दिन पर हवन भी करते हैं. यह सब करने से भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद मिलता है और काम में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं.
भगवान विश्वकर्मा को हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. उन्हें सृष्टि का रचयिता भी कहा जाता है. उन्होंने ही स्वर्ग लोक, द्वारका और हस्तिनापुर जैसे कई दिव्य लोकों का निर्माण किया था. इसलिए, जो लोग निर्माण क्षेत्र से जुड़े हैं, जैसे कि इंजीनियर, आर्किटेक्ट, कारीगर और मजदूर, उनके लिए यह दिन बहुत खास होता है. वे इस दिन अपने काम के औजारों को ही अपना धन मानते हैं और उनकी पूजा करते हैं. यह पर्व हमें सिखाता है कि हमें अपने काम और अपने औजारों का सम्मान करना चाहिए.
इस पर्व को मनाने का तरीका भी बहुत सरल है. सबसे जरूरी है कि आप अपने काम की जगह को साफ रखें और अपने औजारों को भी साफ रखें. यह दिखाता है कि आप अपने काम को कितनी अहमियत देते हैं. भगवान विश्वकर्मा की पूजा करके हम उनसे प्रार्थना करते हैं कि वे हमें अपने काम में सफल बनाएं और हमें तरक्की दें. यह पर्व सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन में मेहनत और हुनर के महत्व को भी याद दिलाता है.