तेजस्वी यादव ने बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनाव पुनः कराने की मांग की, चुनाव आयोग पर उठाए गंभीर सवाल

NewsPoint•
Navbharat Times
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने बुधवार को पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। इस मौके पर उन्होंने चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर गंभीर आरोप लगाए। तेजस्वी ने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजे फर्जीवाड़े का परिणाम हैं और दोनों राज्यों में दोबारा चुनाव कराने की मांग की। उन्होंने चुनाव आयोग पर यह भी आरोप लगाया कि इसका उपयोग बीजेपी के पक्ष में किया जा रहा है, जिससे संवैधानिक संस्थाओं की स्थिति कमजोर हुई है।

तेजस्वी यादव ने अपनी बातें एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर रखी। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 महीनों में दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कई फैसलों पर 14 बार आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने कहा, "विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर दो चुनाव आयुक्तों ने सवाल उठाए, लेकिन चुनाव आयोग ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया।" तेजस्वी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया कि वह केंद्र सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं।
राजद नेता ने कहा कि उनकी पार्टी ने बिहार में SIR की प्रक्रिया शुरू होने पर इसका विरोध किया था और इस मुद्दे को वे सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने का इरादा रखते हैं। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए आम मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं और बीजेपी के समर्थकों के नाम जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

तेजस्वी ने विभिन्न राज्यों में विपक्ष की हार को केवल चुनावी नतीजा नहीं माना। उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और सरकारी मशीनरी के कथित दुरुपयोग ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया है।" उन्होंने चुनाव से संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की अवधि में बदलाव का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि पहले मतदान और मतगणना का रिकॉर्ड एक साल तक सुरक्षित रखा जाता था, लेकिन इसे घटाकर 45 दिन कर दिया गया है। इससे उन लोगों के लिए समस्या हो सकती है जो चुनावी प्रक्रिया को चुनौती देना चाहते हैं क्योंकि साक्ष्य जुटाने में कठिनाई होगी।

तेजस्वी ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव का भी विरोध किया। पहले इस प्रक्रिया में भारत के प्रधान न्यायाधीश की भूमिका होती थी, जिसे बदलकर केंद्रीय मंत्री से कर दिया गया है। उन्होंने 1995 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा, "चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त बराबर होते हैं तथा CEC 'फर्स्ट अमंग इक्वल्स' होते हैं।"

तेजस्वी ने कहा कि यदि दो चुनाव आयुक्तों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं, तो उनके सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं को प्रभावित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया, "लोकतंत्र में जनता के वोट का अधिकार सर्वोपरि है। यदि चुनाव प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगें, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है।"

तेजस्वी ने दोहराया कि बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनाव फर्जीवाड़े से प्रभावित हुए हैं और उनके अनुसार वहां पुनः चुनाव कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजद इस मामले में कानूनी और राजनीतिक कदम उठाएगी।

इस प्रकार, तेजस्वी यादव की ओर से उठाए गए सवाल चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर महत्वपूर्ण संकेत देते हैं। उनकी मांगों में गहराई है और यह बताने में मदद मिलती है कि इन मुद्दों का महत्व लोकतंत्र की स्थिरता के लिए कितना है।

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