महाराजा हरि सिंह की जयंती पर भक्तों ने रियासी में किया हवन यज्ञ, बलवंत ठाकुर ने युवाओं को प्रेरित किया
महाराजा हरि सिंह की जयंती पर भक्तों ने रियासी में किया हवन यज्ञ, बलवंत ठाकुर ने युवाओं को प्रेरित किया
NewsPoint•
रियासी में 23 सितंबर को महाराजा हरि सिंह की जयंती के अवसर पर ऑल इंडिया राजपूत एकता मंच ने आयोजित हवन यज्ञ में भाग लिया। इस मौके पर यहाँ महाराजा की मूर्ति के पास हवन पूजन किया गया, जिसके बाद भक्तों को प्रसाद बांटा गया। पद्मश्री बलवंत ठाकुर ने कहा कि युवाओं को महाराजा के जीवन और इतिहास को फिर से पहचानने की जरूरत है। वे बताना चाहते थे कि वे महाराजा हरि सिंह पर एक फिल्म बना रहे हैं और उनका व्यक्तित्व जितना अधिक खोज करने पर सामने आ रहा है, उतना ही महान होता जा रहा है।
बलवंत ठाकुर ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं। रियासी के सभी लोगों को मुबारकबाद देता हूं। इस समय महाराजा हरि सिंह के जन्मदिवस पर जितने भी कार्यक्रम हो रहे हैं, उनमें सबसे बड़े स्तर पर रियासी में हो रहा है। युवाओं ने जो बीड़ा उठाया है, बहुत ही अच्छा है। मेरा एक ही संदेश है कि जोश दिखाना बहुत जरूरी है, लेकिन पढ़ाई-लिखाई को भी मजबूत करना जरूरी है।” उन्होंने आगे कहा कि युवाओं में देश के इतिहास और संस्कृति के प्रति उदासीनता नहीं होनी चाहिए। हमें अपनी संस्कृति और भाषा पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि, “हमारे पास बहुत कुछ है। जितनी कहानियां और वीर गाथाएं हमारे पास हैं, उतनी दुनिया में किसी और के पास नहीं हैं।” उनका मानना है कि इन वीर गाथाओं को उजागर करना आवश्यक है।
ठाकुर ने युवाओं को जागरूक करते हुए कहा कि हमें दूसरों देशों में प्रेरणा देखने की जरूरत नहीं है। हमारे आसपास ही बहुत सी प्रेरणादायक बातें हैं। उन्होंने कहा कि महाराजा हरि सिंह के बारे में बहुत कम लिखा गया है और युवाओं को इनके बारे में जानकारी भी कम है। चुप्पी को तोड़ना जरूरी है और उनके बारे में अधिक जानने की कोशिश करनी चाहिए।
भाजपा विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया ने भी इस अवसर पर अपनी राय रखी। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर निशाना साधते हुए कहा, “नेशनल कॉन्फ्रेंस का शुरू से ही महाराजा के प्रति एक खास रवैया रहा है। उन्होंने कश्मीर के लोगों को यह कहकर गुमराह किया कि महाराजा का बेटा ही महाराजा बनेगा।” उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक प्रणाली को खत्म करने की कोशिश की।
मनकोटिया ने यह सवाल भी उठाया कि, “अगर महाराजा का बेटा ही महाराजा बनता था, तो 1931 के आसपास से कश्मीर में क्या हालात थे? क्या अब महाराजा का बेटा ही महाराजा नहीं बनता?” इसका जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जो प्राक्टिस खत्म करने की कोशिश की थी, वही व्यवहार अब वे खुद कर रहे हैं।
उनका मानना है कि, “डेमोक्रेसी कहां है? नेशनल कॉन्फ्रेंस के अंदर डेमोक्रेसी कहां है?” उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने हमेशा कोशिश की है कि कश्मीर में डेमोक्रेसी का अस्तित्व ना हो।
इस प्रकार, महाराजा हरि सिंह की जयंती पर आयोजित समारोह ने ना केवल उनकी महानता को उजागर किया बल्कि युवाओं को भी प्रेरित किया कि वे अपनी संस्कृति और इतिहास को जानें और समझें। ऐसे आयोजनों से ही हमारी संस्कृति और इतिहास को दरकिनार नहीं किया जा सकेगा।