कांग्रेस नेता भाई जगताप ने चुनाव आयोग प्रमुख ज्ञानेश कुमार पर उठाए गंभीर आरोप, 2 करोड़ 52 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने पर चर्चा

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महाराष्ट्र में एसआईआर के अंतर्गत 2 करोड़ 52 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने पर सियासी हलचल तेज हो गई है। यह मुद्दा कांग्रेस नेता भाई जगताप द्वारा चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार पर सीधे हमले के साथ उठाया गया। जगताप ने उन पर आरोप लगाया कि वे सरकार के हित में काम कर रहे हैं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी बताया कि यह सियासी मामला केवल महाराष्ट्र का नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र का भी है।

कांग्रेस नेता भाई जगताप ने कहा कि "इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा, लेकिन एक बात से मैं सहमत हूं। देश की संसद की अपनी एक गरिमा है, वो 140 करोड़ जनता का मंदिर है। यह बात सही है कि उसी मंदिर में पाप हो रहे हैं, उसी मंदिर में लोकतंत्र की हत्या हो रही है।" उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री अक्सर संसद में नहीं आते हैं और यह 16-16 दिन तक काम नहीं करता है। इस संदर्भ में उनका गुस्सा जायज है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा, "मैं यही कहूंगा कि 140 करोड़ आबादी वाले विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का यह पवित्र मंदिर है और हमें इसकी गरिमा बनाए रखनी चाहिए।"
जगताप ने प्रधानमंत्री के मंत्रालय और कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चिंतन-मंथन किस बात का? "चिंतन करिए, मंथन करिए, मनन करिए, जो करना है करिए, लेकिन देश का लोकतंत्र बचाइए।" इसके बाद चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार पर उन्होंने तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को शर्म आनी चाहिए कि इसके कमिश्नर खुद एसआईआर को अलोकतांत्रिक बताकर मना कर रहे हैं, फिर भी मुख्य चुनाव आयुक्त इस दिशा में कदम उठा रहे हैं।

भाई जगताप ने कहा, "आपके चुनाव आयोग के कमिश्नर ही मना कर रहे हैं कि एसआईआर मत करिए, ये विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और ये अलोकतांत्रिक होगा।" फिर भी, ज्ञानेश कुमार ने सरकार को बचाने के लिए जो कदम उठाए हैं, उन्हें गलत बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से वोटरों के अधिकारों का हनन हो रहा है, वह पूरी तरह से गलत है।

जब उन्होंने महाराष्ट्र में चुनाव आयोग के सीईओ से सवाल किया कि 9 करोड़ वोटरों में से 2 करोड़ 52 लाख वोटरों के नाम क्यों काटे जा रहे हैं, तो उन्होंने बताया कि "आप 25-27 फीसदी वोटरों को हटा रहे हैं, जो सालों से वोट करते आ रहे हैं। क्या ये सही है?"

भाई जगताप ने यह भी जोड़ा कि "जो गलत है उसे निकालिए, लेकिन जिस तरह से महाराष्ट्र में ये सरकार बनी है, वो वोट चोरी से बनी है।"उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया में बड़ी भूमिका है। कांग्रेस नेता ने ज्ञानेश कुमार को रघुवीर की तरह सरकार के बाहर गुलाम की तरह काम करने वाला बताया। उन्हें ऐसा लगता है कि यह सब सरकार और भाजपा को खुश करने के लिए किया जा रहा है ताकि रिटायर होने के बाद कहीं एडजस्ट हो सकें।

भाई जगताप ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है। उन्होंने फिर से दोहराया कि "हम पहले भी कह चुके हैं और आज भी कह रहे हैं कि एसआईआर के तहत जितने भी चुनाव हुए हैं, वे सभी रिकॉल होने चाहिए।" उनका यह बयान इस बात को दिखाता है कि वे अपने विचार और आवाज को बिना डर के व्यक्त कर रहे हैं।

इस मुद्दे ने महाराष्ट्र में सियासी पारा चढ़ा दिया है। राजनीतिक खींचतान के बीच जनता भी इस पर अपनी राय रख रही है। महाराष्ट्र में यह मुद्दा केवल एक चुनावी प्रक्रिया का नहीं है, बल्कि लोकतंत्र के मूलभूत अधिकारों के हनन का मुद्दा बन चुका है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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