गाज़ियाबाद जैसा हादसा हुआ तो कैसे होगा बचाव

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गुड़गांव में आग से निपटने की तैयारी चिंताजनक है। शहर में ऊंची इमारतें हैं, लेकिन फायर ब्रिगेड के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। गाजियाबाद जैसी घटना की आशंका है। मई के अंत तक नए उपकरण और स्टाफ मिलने की उम्मीद है। इससे बचाव कार्यों में सुधार की आशा है।

if an accident like ghaziabad happens in gurugram rescue will be difficult fire brigade lacks adequate resources

Surender.Singh

@timesofindia.com

n गुड़गांव: ऑटोमोबाइल और साॅफ्टवेयर इंडस्ट्री के मामले में देश में बंगलुरू के बाद दूसरे स्थान पर खड़ा गुड़गांव आगजनी से निपटने के मामले में बैकफुट पर नजर आ रहा है। अगर समय रहते यहां पर भी नहीं चेते तो शहर में गाजियाबाद की गौड़ ग्रीन ऐवेन्यू सोसायटी जैसा हादसा हो सकता है। नगर निगम की फायर विग के बेड़े में न तो पर्याप्त स्टाफ है और न नहीं संसाधन हैं। शहर में 190 मीटर ऊंची बिल्डिंगें हैं, जबकि फायर ब्रिगेड के पास केवल 42 मीटर ऊंचा हाईड्रोलिक प्लैटफॉर्म है। वह भी दो साल से आउट ऑफ ऑर्डर है। हालांकि मई माह के अंत तक स्टाफ और संसाधन आने का दावा किया जा रहा है।

गाजियाबाद के इंदिरापुरम की गौड़ ग्रीन एवेन्यू के टावर-डी की नौवीं मंजिल स्थित एक फ्लैट में बुधवार को भीषण आग लग गई। वहीं गुड़गांव की बात करें तो यहां 7 फायर स्टेशन हैं। सेक्टर 29, भीम नगर, उद्योग विहार, सेक्टर-37,आईएमटी मानेसर, पटौदी और सोहना फायर स्टेशन हैं। इनमें वाटर बाउजर, फोम बाउजर, वाटर टेंडर, स्मॉल टेंडर और वाटर मिस्ट बाइक की संख्या 63 है। इसके अलावा 100 फायर मैन, 37 ड्राइवर हैं। 39 आउट सोर्स स्टॉफ अलग से हैं, जबकि शहर की जनसंख्या 30 लाख के करीब है। अगर सोसायटियों की बात की जाए तो वह 2 हजार 250 से अधिक हैं। यह स्टाफ और संसाधन ऊंट के मुंह में जीरा समान है। देश में चेन्नई और कर्नाटका में सबसे ऊंचा हाईड्रोलिक प्लैटफॉर्म 105 मीटर का है।

अगले माह के अंत तक आएंगी गाड़ियां: प्रदेश सरकार की ओर से मई के अंत तक प्रदेश भर में फायर विंग के बेड़े में स्टॉफ और संसाधान मिलने की उम्मीद है। अगले माह तक 104 मीटर, 90 मीटर, 70 मीटर, 64 मीटर और 55 मीटर तक की ऊंचाई के हाईड्रोलिक प्लैटफार्म में से कुछ गाड़ियां मिल सकती हैं।