माफ़ी नहीं मांगी

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बंग भंग आंदोलन के समय वंदे मातरम् पर रोक थी। नागपुर के एक स्कूल में एक बालक ने नारा लगाया और स्कूल से निकाल दिया गया। उसने हार नहीं मानी। दूसरे स्कूल से परीक्षा दी और डॉक्टर बना। उसने देश को एक करने का प्रयास किया। यह बालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार थे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की।

did not apologize the unforgettable story of revolutionary dr keshav baliram hedgewar

बंग भंग आंदोलन के दौरान ब्रिटिश सरकार ने वंदे मातरम् बोलने पर प्रतिबंध लगा दिया था। अंग्रेजों को डर था कि यदि वंदे मातरम् के नारे पर रोक नहीं लगाई गई तो सभी भारतीय एकजुट हो जाएंगे और फूट डालने की उनकी नीति असफल हो जाएगी। एक दिन की बात है, नागपुर के नील सिटी स्कूल में स्कूल इंस्पेक्टर पहुंचे। सभी बच्चे इंस्पेक्टर के स्वागत में कतार में खड़े थे। एक बालक जो कतार में सबसे आगे था, उसका इशारा पाते ही हर तरफ से ‘वंदे मातरम्’ का नारा गूंजने लगा। इससे इंस्पेक्टर समेत स्कूल का पूरा स्टाफ दंग रह गया। बालक से माफी मांगने को कहा गया, पर उसने इनकार कर दिया। आखिरकार उसे स्कूल से निकाल दिया गया। उसने दूसरे स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा दी। अपनी प्रतिभा के बल पर वह बच्चा बाद में डॉक्टर बना और पूरे देश को एकसूत्र में बांधने का प्रयास किया। आज उस बालक को दुनिया क्रांतिकारी डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के नाम से जानती है। उनका जन्म 1 अप्रैल 1889 को नागपुर में हुआ था। उन्होंने ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नींव रखी।