बंग भंग आंदोलन के दौरान ब्रिटिश सरकार ने वंदे मातरम् बोलने पर प्रतिबंध लगा दिया था। अंग्रेजों को डर था कि यदि वंदे मातरम् के नारे पर रोक नहीं लगाई गई तो सभी भारतीय एकजुट हो जाएंगे और फूट डालने की उनकी नीति असफल हो जाएगी। एक दिन की बात है, नागपुर के नील सिटी स्कूल में स्कूल इंस्पेक्टर पहुंचे। सभी बच्चे इंस्पेक्टर के स्वागत में कतार में खड़े थे। एक बालक जो कतार में सबसे आगे था, उसका इशारा पाते ही हर तरफ से ‘वंदे मातरम्’ का नारा गूंजने लगा। इससे इंस्पेक्टर समेत स्कूल का पूरा स्टाफ दंग रह गया। बालक से माफी मांगने को कहा गया, पर उसने इनकार कर दिया। आखिरकार उसे स्कूल से निकाल दिया गया। उसने दूसरे स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा दी। अपनी प्रतिभा के बल पर वह बच्चा बाद में डॉक्टर बना और पूरे देश को एकसूत्र में बांधने का प्रयास किया। आज उस बालक को दुनिया क्रांतिकारी डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के नाम से जानती है। उनका जन्म 1 अप्रैल 1889 को नागपुर में हुआ था। उन्होंने ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नींव रखी।

