फिर वही ग़लती

नवभारतटाइम्स.कॉम

बिहार के नालंदा में शीतला माता मंदिर में भगदड़ से नौ महिलाओं की मौत हो गई। भीड़, तंग जगह और इंतजामों की कमी से यह हादसा हुआ। देश में ऐसे हादसे बार-बार हो रहे हैं। पिछले साल आंध्र प्रदेश, हरिद्वार और तिरुपति में भी भगदड़ हुई थी। राजनीतिक रैलियों में भी भीड़ अनियंत्रित होने से जान गई हैं।

nalanda stampede same mistake again 9 women dead due to crowd management failure

बिहार के नालंदा में शीतला माता मंदिर में मची भगदड़ की अब तक कोई नई वजह सामने नहीं आई है। ज्यादा भीड़, तंग जगह, अफवाह और फिर अफरातफरी। विपदा की यही स्क्रिप्ट देश में बार-बार दिखती रही है।

इंतजाम पर्याप्त नहीं । प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, महावीर जयंती और मंगलवार का दिन होने के कारण भीड़ ज्यादा थी, जबकि इंतजाम नाकाफी। बताया जा रहा है कि एक जगह बैरिकेड टूटा, जिससे लोग संभल नहीं पाए। श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रबंधन और पुलिस पर आरोप लगाए हैं कि भीड़ को देखते हुए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई थी।

बार-बार होते हादसे । वक्त और जगह बदल दीजिए, तो ऐसे हालात बार-बार बन रहे हैं। पिछले साल नवंबर में आंध्र के श्रीकाकुलम जिले के वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में भगदड़ से 9 लोगों की मौत हो गई थी। वहां भी हादसा बैरिकेड टूटने से हुआ। उसके पहले जुलाई में हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में अफवाह ने कई लोगों की जान ले ली और जनवरी में तिरुपति मंदिर में हद से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचने की वजह से हालात बिगड़ गए थे।

भारी पड़ती गलती । केवल धार्मिक स्थल या आयोजन ही नहीं, राजनीतिक रैलियां भी जानलेवा साबित हुई हैं, जैसे पिछले साल सितंबर में अभिनेता से नेता बने विजय की रैली, जिसमें भीड़ अनियंत्रित होने की वजह से 39 लोगों की जान चली गई थी। फिर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका डाली गई थी कि राजनीतिक रैलियों और सभाओं में भीड़ प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। अदालत ने इसे सरकार की जिम्मेदारी बताया था।

क्राउड मैनेजमेंट । सार्वजनिक जगहों पर भीड़ के सैलाब को संभालना हमेशा से चुनौती रहा है। नैशनल क्राइम रेकॉर्ड ब्यूरो का डेटा बताता है कि पिछले तीन दशक में लगभग 4000 भगदड़ हुई हैं। 2000 से 2022 के दौरान विभिन्न भगदड़ों में 3074 लोगों की मौत हुई। आज भी अगर यह संख्या बढ़ रही है, तो इसकी वजह है कि पुराने हादसों से कभी सबक नहीं सीखा गया। क्राउड मैनेजमेंट किसी भी आयोजन या उत्सव का सबसे जरूरी हिस्सा है, लेकिन इसकी बात दुर्घटना के बाद ही की जाती है।

सख्ती जरूरी । बिहार में मरने वाली सभी 9 महिलाएं हैं। कई की हालत गंभीर है, तो आंकड़ा बदल भी सकता है। इस तरह के हादसों के पीड़ितों में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की संख्या ज्यादा होती है, क्योंकि वे अपना बचाव नहीं कर पाते। देश में जहां छोटे-छोटे आयोजनों में भी हजारों लोग जुट जाते हैं, वहां क्राउड मैनेजमेंट के सख्ती से पालन की जरूरत है।