'दावत-ए-सुखन' में लगे ठहाके

नवभारतटाइम्स.कॉम
dawat e sukhan witnesses a confluence of humor satire and poetry audience applauds heartily
n NBT न्यूज, लखनऊ: अदब और हास्य-व्यंग्य के अनूठे रंगों से सजी ' दावत-ए-सुखन ' की शाम शनिवार को शायरी और कविताओं के नाम रही। फैज़ाबाद रोड स्थित एक रिसॉर्ट में आयोजित इस महफ़िल में देश के प्रतिष्ठित शायरों और कवियों ने अपने कलाम से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा और जमकर तालियां बटोरीं।

कार्यक्रम में कवि हेमंत पांडे ने पढ़ा 'एक फूल तुझे देने के लिये सस्ते में ले लिया'। वहीं हास्य कवि शंभू शिखर ने अपने अंदाज़ में तीखे व्यंग्य बाण छोड़े, 'उसको खिलाये बिन मैं कुछ भी खाता नहीं हूं'।
मंच पर नामचीन रचनाकारों की मौजूदगी: हास्य के अलावा महफ़िल में अदब और नज़्मों का दौर भी चला। मंच पर शबीना अदीब, हसन काज़मी, नदीम फर्रूख़, सर्वेश अस्थाना, जौहर कानपुरी, प्रियांशु गजेंद्र, डॉ. सोनरूपा, वासिफ फ़ारूक़ी, राम प्रसाद बेखुद और फ़ैज़ ख़ुमार बाराबंकवी जैसे वरिष्ठ रचनाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से इस शाम को यादगार बना दिया।