निर्णय की कसौटी

नवभारतटाइम्स.कॉम
einsteins priceless advice on love and family the test of decision
28 अक्टूबर 1951 को मनोविज्ञान के एक स्नातक छात्र ने प्रिंसटन में अल्बर्ट आइंस्टाइन को एक पत्र लिखा। पूछा, ‘प्रेम और माता-पिता में से किसी एक को चुनने की नौबत आ जाए तो क्या किया जाए?’ युवक इकलौती संतान था। उसका परिवार यहूदी था और बैपटिस्ट लड़की से प्रेम करता था। दोनों एक-दूसरे को बहुत चाहते थे और हर तरह से विचार कर लिया था। लड़की तो भविष्य के पारिवारिक जीवन को सहज बनाने के लिए यहूदी धर्म अपनाने को भी तैयार थी। माता-पिता लड़की को पसंद करते थे, लेकिन अंतरधार्मिक विवाह को लेकर आशंकित थे। युवक दुविधा में था- प्रेम को चुने तो माता-पिता के दुखी होने की चिंता, और माता-पिता की इच्छा माने तो अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण रिश्ते को खोने का डर। आइंस्टाइन ने कहा, ‘जीवन का ऐसा निर्णय व्यक्ति को स्वयं लेना चाहिए। लेकिन, पहले खुद से एक सवाल पूछना जरूरी है- क्या माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध जाकर भी अपना आंतरिक संतुलन बनाए रख सकता है? यदि उसे इसका विश्वास नहीं है, तो उसके लिए ऐसा कदम उठाना उचित नहीं होगा। निर्णय इसी कसौटी पर होना चाहिए।’