गूंजीं उत्तराखंड के पहले लोक गायक की यादें

नवभारत टाइम्स

उत्तराखंड के लोक गायक जीत सिंह नेगी को उनकी 99वीं जयंती पर याद किया गया। न्यू अशोक नगर में आयोजित समारोह में उनके गीतों और संस्मरणों को साझा किया गया। भाषा क्लास के केंद्र प्रमुखों और सहयोगियों का भी सम्मान हुआ। नेगी को उत्तराखंड की लोक संस्कृति का वट वृक्ष कहा गया।

memories of uttarakhands first folk singer jeet singh negi echoed on his 99th birth anniversary grand event announced for 100th anniversary
नई दिल्ली: उत्तराखंड की लोक संस्कृति के महान गायक जीत सिंह नेगी को उनकी 99वीं जयंती की पूर्व संध्या पर न्यू अशोक नगर में एक खास समारोह में याद किया गया। उत्तराखंड लोक-भाषा साहित्य मंच ने यह आयोजन किया, जिसमें नेगी के गीतों और उनकी यादों को साझा किया गया। इस मौके पर भाषा क्लास के केंद्र प्रमुखों और सहयोगियों को सम्मानित भी किया गया।

उत्तराखंड लोक-भाषा साहित्य मंच के संयोजक दिनेश ध्यानी ने जीत सिंह नेगी को "हमारी लोक संस्कृति के वट वृक्ष" बताया। उन्होंने यह भी बताया कि अगले साल 2 फरवरी, 2027 को नेगी जी की 100वीं जयंती पर एक बहुत बड़ा आयोजन किया जाएगा। ध्यानी ने कहा कि नेगी जी का एक सपना था कि गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषाएं संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल हों। अगर ऐसा होता है, तो यह जीत सिंह नेगी का भी सपना पूरा होगा।
मंच के संरक्षक डॉ. विनोद बछेती ने नई पीढ़ी से जीत सिंह नेगी के काम को समझने की अपील की। उन्होंने बताया कि जीत सिंह नेगी उस समय के उत्तराखंड के पहले ऐसे लोक गायक थे, जिनका एलपी रिकॉर्ड (ग्रामोफोन रिकॉर्ड) साल 1949 में ही बन गया था। उनके लिखे नाटक भी बहुत पसंद किए गए और उन्होंने कई जानी-मानी किताबें भी लिखीं। जीत सिंह नेगी को संगीत नाटक अकादमी सम्मान से भी नवाजा गया था।

इस समारोह में पूर्वी दिल्ली के डीएम कुलानंद जोशी, दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह नेगी, प्रोफेसर हरेंद्र असवाल, कवि जयपाल सिंह रावत, दर्शन सिंह रावत, रमेश चंद्र घिल्डियाल 'सरस', दिनेश ध्यानी, डॉ. रुचि राणा, बृजमोहन वेदवाल, निर्मला नेगी, दयाल नेगी, रेखा चौहान, नेत्र सिंह असवाल, दीनदयाल बंदूणी, चंदन प्रेमी, दिग्पाल कैंतुरा, सुशील बुडकोटी, दीवान सिंह नेगी 'रिंगूण', जगमोहन सिंह रावत 'जगमोरा', अनूप रावत, सागर पहाड़ी, द्वारिका चमोली, भगवती प्रसाद जुयाल, सुशील बुडाकोटी, रामेश्वरी नादान, अनिल कुमार पंत, जबर सिंह कैंतुरा, संदीप गढ़वाली, गोविंद राम पोखरियाल 'साथी', और वीरेंद्र जुयाल 'उपरी' जैसे कई गणमान्य लोग मौजूद थे। सभी ने मिलकर जीत सिंह नेगी को श्रद्धांजलि दी और उनकी लोक संस्कृति में दिए गए योगदान को याद किया।