485 करोड़ के बाद भी लटकते तार और जमीन पर रखे ट्रांसफॉर्मर

नवभारत टाइम्स

गाजियाबाद में बिजली व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च हुए। इसके बावजूद शहर में बिजली कटौती जारी है। गलियों में तार लटक रहे हैं और खुले ट्रांसफार्मर खतरा पैदा कर रहे हैं। रोस्टर के अनुसार आपूर्ति नहीं हो रही है। ओवरलोड ट्रांसफार्मर समस्या बढ़ा रहे हैं। अंडरग्राउंड केबल डालने का काम चल रहा है।

despite 485 crores hanging wires and ground transformers power system in ghaziabad is in bad shape
गाजियाबाद में बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जनता को राहत नहीं मिल रही है। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी लगातार बिजली कटौती हो रही है और गलियों में लटकते तार व खुले ट्रांसफार्मर लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। बीते साल 100 से ज्यादा ट्रांसफार्मर खराब हुए और 150 से ज्यादा लोग करंट की चपेट में आए।

बिजनेस प्लान 2023-24 में 142 करोड़, 2024-25 में 148 करोड़ और आरडीएसएस के तहत 203 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके अलावा, 2025-26 के लिए 200 करोड़ रुपये और खर्च किए जा रहे हैं। इन भारी भरकम खर्चों के बावजूद, शहर में बिजली की आपूर्ति उम्मीद के मुताबिक नहीं है। रोस्टर के अनुसार शहरी इलाकों में 24 में से 22 घंटे, ग्रामीण क्षेत्रों में 22 घंटे और नगर क्षेत्र में करीब 20 घंटे बिजली मिलनी चाहिए। लेकिन हकीकत में हर जगह 4 से 5 घंटे की कटौती हो रही है।
समस्या की एक बड़ी वजह ओवरलोड ट्रांसफार्मर हैं। करीब 74 जगहों पर ट्रांसफार्मर अपनी क्षमता से ज्यादा लोड उठा रहे हैं, जिससे बिजली कटौती की समस्या बनी रहती है। इसके अलावा, गलियों और मोहल्लों में लटकते बिजली के तार और खुले में रखे ट्रांसफार्मर लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। पिछले साल ही 100 से ज्यादा ट्रांसफार्मर खराब हुए और 150 से ज्यादा लोग करंट लगने की घटनाओं का शिकार हुए।

बिजली विभाग के मुख्य अभियंता पवन अग्रवाल का कहना है कि बिजनेस प्लान के तहत काम चल रहे हैं और पहले की तुलना में बिजली आपूर्ति में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, "शिकायतों का जल्द समाधान किया जा रहा है। जर्जर तारों और सौंदर्यकरण पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। फॉल्ट की संख्या कम करने के लिए कई स्थानों पर अंडरग्राउंड केबल डाली जा रही है।" अंडरग्राउंड केबल डालने का काम इसलिए किया जा रहा है ताकि तारों को सुरक्षित किया जा सके और बिजली कटौती की समस्या को कम किया जा सके। यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें बिजली के तारों को जमीन के नीचे दबा दिया जाता है, जिससे वे सुरक्षित रहते हैं और मौसम की मार से भी बचे रहते हैं।