राहुल गांधी पर FIR का आधार बताएं: HC

नवभारत टाइम्स

राहुल गांधी पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से मुकदमा दर्ज कराने का आधार बताने को कहा है। याचिका में आधार स्पष्ट नहीं था। याची ने राहुल गांधी के एक बयान को लेकर यह मांग की थी।

fir against rahul gandhi hc asks for basis of demand for case registration without stating grounds
प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता और रायबरेली सांसद राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई की है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा है कि वे किस आधार पर राहुल गांधी पर मुकदमा दर्ज करवाना चाहते हैं। याचिका में इस मुकदमे का कोई कारण नहीं बताया गया था। इसलिए, कोर्ट ने याचिकाकर्ता से एक अतिरिक्त हलफनामा (सप्लीमेंट्री हलफनामा) दाखिल कर मुकदमा दर्ज कराने का आधार स्पष्ट करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने संभल भीमनगर की सिमरन गुप्ता की याचिका पर दिया।

याचिकाकर्ता सिमरन गुप्ता ने राहुल गांधी के 15 जनवरी 2025 को दिए गए एक बयान का हवाला देते हुए उन पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश देने की मांग की है। इस मामले में, याचिकाकर्ता ने पहले संभल की स्पेशल एमपी/एमएलए कोर्ट में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSNS) की धारा 174(4) के तहत एक प्रार्थना पत्र दिया था। हालांकि, अदालत ने उनके इस प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया था। इसके बाद, उन्होंने अपर सेशन जज संभल के पास निगरानी याचिका दायर की, जिसे भी खारिज कर दिया गया। अब, इन दोनों अदालती आदेशों को हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है।
हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा है कि वे किस आधार पर राहुल गांधी पर मुकदमा दर्ज करवाना चाहते हैं। याचिका में इस मुकदमे का कोई कारण नहीं बताया गया था। इसलिए, कोर्ट ने याचिकाकर्ता से एक अतिरिक्त हलफनामा (सप्लीमेंट्री हलफनामा) दाखिल कर मुकदमा दर्ज कराने का आधार स्पष्ट करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने संभल भीमनगर की सिमरन गुप्ता की याचिका पर दिया।

याचिकाकर्ता सिमरन गुप्ता ने राहुल गांधी के 15 जनवरी 2025 को दिए गए एक बयान का हवाला देते हुए उन पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश देने की मांग की है। उन्होंने पहले संभल की स्पेशल एमपी/एमएलए कोर्ट में BNSNS की धारा 174(4) के तहत एक प्रार्थना पत्र दिया था। लेकिन, अदालत ने उनके इस प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया था। इसके बाद, उन्होंने अपर सेशन जज संभल के पास निगरानी याचिका दायर की, जिसे भी खारिज कर दिया गया। अब, इन दोनों अदालती आदेशों को हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है।