NBW के बावजूद गिरफ्तारी नहीं, कैसे बहाल हो जनता का भरोसा: HC

नवभारत टाइम्स

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गैरजमानती वॉरंट जारी होने के बाद भी गिरफ्तारी न होने पर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने पुलिस और आरोपितों के बीच मिलीभगत की आशंका जताई है। इस मामले में गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त और हापुड़ के एसएसपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया है।

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गैर जमानती वॉरंट (एनबीडब्ल्यू) जारी होने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पुलिस और आरोपियों के बीच मिलीभगत की आशंका भी जताई है। यह मामला 2019 की एक आपराधिक अपील से जुड़ा है, जिसमें हत्या के दोषी के खिलाफ जारी एनबीडब्ल्यू लंबे समय से तामील नहीं हुआ था। कोर्ट ने साफ कहा कि वे पुलिस की कार्यशैली को समझते हैं और अदालत को हल्के में लेने वालों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पाया कि पुलिस रिपोर्ट और आरोपी के हलफनामे में बड़ा अंतर था। पुलिस ने कहा कि आरोपी का पता नहीं चला, जबकि आरोपी ने हलफनामे में बताया कि पुलिस उसके घर आई थी और उसे वॉरंट की जानकारी दी गई थी। इस विरोधाभास से कोर्ट का गुस्सा और बढ़ गया।
कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त और हापुड़ के सीनियर पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को 4 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया। साथ ही, जिन अधिकारियों ने एनबीडब्ल्यू तामील नहीं किया था, उनसे व्यक्तिगत हलफनामा भी मांगा गया था।

सुनवाई के दौरान, एसएसपी हापुड़ और डीसीपी गौतम बुद्ध नगर कोर्ट में हाजिर हुए। गौतम बुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। कोर्ट ने आयुक्त की ओर से प्रतिनिधि भेजे जाने पर आपत्ति जताई और साफ कहा कि वे किसी प्रतिनिधि को नहीं सुनेंगे, बल्कि आयुक्त को खुद पेश होना होगा।

सरकार के अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में संबंधित कॉन्स्टेबल, उप-निरीक्षक और अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस आयुक्त इस मामले में विभागीय जांच भी करवा रहे हैं। उन्होंने कोर्ट को आश्वासन दिया कि भविष्य में अदालत द्वारा जारी एनबीडब्ल्यू का समय पर निष्पादन सुनिश्चित किया जाएगा।

कोर्ट ने अपनी मौखिक टिप्पणी में पुलिस बल को कड़ा संदेश दिया। खंडपीठ ने कहा, “पुलिस बल को बता दीजिए कि यह कानून का न्यायालय है। हमें कानून और अदालत की कार्यप्रणाली की पूरी समझ है। हो सकता है कि हमें पुलिस की कार्यशैली का पूरा ज्ञान न हो, लेकिन हम इतना समझदार ज़रूर हैं कि यह पहचान सकें कि कब पुलिस अदालत को हल्के में ले रही है। हमसे खेल मत खेलिए और जनता का भरोसा मत तोड़िए।” कोर्ट का यह बयान पुलिस की लापरवाही और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है।

यह मामला इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि कैसे अदालती आदेशों का पालन न करने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। एनबीडब्ल्यू एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य आरोपी को अदालत में पेश करना है। जब इस प्रक्रिया में देरी होती है, तो न्याय मिलने में बाधा आती है और जनता का न्याय प्रणाली पर भरोसा कम होता है। कोर्ट की इस कार्रवाई से उम्मीद है कि भविष्य में पुलिस इस तरह की लापरवाही नहीं करेगी और अदालती आदेशों का समय पर पालन करेगी।

इस मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को तय की गई है। तब तक यह देखना होगा कि पुलिस विभाग इस मामले में क्या और कार्रवाई करता है और क्या वाकई में अदालती आदेशों का पालन करने में सुधार आता है। यह मामला आम जनता के लिए भी एक सीख है कि कानून के प्रति सभी को जवाबदेह होना चाहिए।