हत्या कर शव सेप्टिक टैंक में फेंका, मां-बेटे समेत तीन को उम्रकैद

नवभारत टाइम्स

फरीदाबाद में एक महिला की हत्या कर शव को सेप्टिक टैंक में फेंकने के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मां-बेटे सहित तीन लोगों को उम्रकैद की सजा दी गई है। यह घटना जमीन के विवाद में हुई थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया और कोर्ट में ठोस सबूत पेश किए।

murder and body thrown in septic tank mother son and two others sentenced to life imprisonment
फरीदाबाद की एक अदालत ने एक महिला की हत्या के मामले में तीन लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह घटना निखिल विहार, इस्माइलपुर की है, जहाँ एक महिला की हत्या कर उसके शव को घर के सेप्टिक टैंक में फेंक दिया गया था। मृतक महिला एक फाइनैंस कंपनी में काम करती थी। इस मामले में दिल्ली के मोलड़बंद एक्सटेंशन निवासी अंबिका भगत, पड़ोसी मनीष कुमार उर्फ मोनू और उसकी मां मधु तिवारी को दोषी पाया गया है।

चीफ डिफेंस काउंसल एडवोकेट रविंद्र गुप्ता ने बताया कि निखिल विहार, इस्माइलपुर के रहने वाले रवि की पत्नी अनामिका एक फाइनैंस कंपनी में नौकरी करती थी। करीब पांच-छह साल पहले, अनामिका ने अंबिका भगत को पलवल में 14 लाख रुपये में एक प्लॉट दिलवाया था, लेकिन उसकी रजिस्ट्री नहीं करवाई थी। जब अनामिका ने पैसे वापस मांगे तो अंबिका भगत ने पैसे नहीं दिए।
5 मार्च 2019 को, जब रवि अपनी ड्यूटी पर गया हुआ था, तब अंबिका भगत, पड़ोसी मनीष कुमार और उसकी मां मधु तिवारी अनामिका के घर आए। उन्होंने अनामिका को बातचीत के बहाने ऑटो से अपने घर मोलड़बंद एक्सटेंशन ले गए। वहां पहुंचकर, अंबिका भगत ने अनामिका पर जमीन की रजिस्ट्री कराने या फिर पैसे वापस दिलाने का दबाव बनाया। जब अनामिका ने मना कर दिया, तो तीनों ने मिलकर उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद उन्होंने शव को घर में बने सेफ्टी टैंक में फेंक दिया।

7 मार्च को, अनामिका के पति रवि ने थाने में केस दर्ज कराया। उन्होंने अंबिका भगत पर अपनी पत्नी को छिपाकर रखने का शक जताया था। पुलिस ने जब अंबिका भगत से पूछताछ की, तो उसने हत्या की बात कबूल कर ली। उसने इस अपराध में मनीष और उसकी मां मधु के शामिल होने की जानकारी भी दी।

पीड़ित पक्ष की सरकारी अधिवक्ता डॉ. रेखा ने अदालत के सामने पुख्ता सबूत पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने अंबिका भगत, मनीष उर्फ मोनू और मधु तिवारी को दोषी करार दिया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। यह मामला जमीन के पैसों के लेन-देन से जुड़ा था, जो एक भयानक हत्या का कारण बना। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सरकारी अधिवक्ता के ठोस सबूतों ने दोषियों को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिला है।