Gold Etf Vs Equity Mutual Funds How Much Space To Give In The Portfolio
गोल्ड ETF vs इक्विटी म्यूचुअल फंड, पोर्टफोलियो में किसे दें कितनी जगह?
नवभारत टाइम्स•
इस साल जनवरी में गोल्ड ईटीएफ में निवेश इक्विटी म्यूचुअल फंड के बराबर पहुंच गया। यह पहली बार हुआ है जब सोने में इतना निवेश आया है। वैश्विक अनिश्चितता और बाजार की अस्थिरता के कारण निवेशक सोने को सुरक्षित मान रहे हैं। हालांकि, इक्विटी में निवेश अभी भी मजबूत बना हुआ है।
मुंबई: इस साल जनवरी में निवेशकों को एक बड़ा झटका लगा जब गोल्ड ETF में निवेश दोगुना होकर 24,040 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह आंकड़ा इक्विटी म्यूचुअल फंड के निवेश के लगभग बराबर रहा। ऐसा पहली बार हुआ है जब सोने के ETF में पैसा लगाने वालों की संख्या इक्विटी फंड्स को टक्कर दे रही है। वहीं, सिल्वर ETF में भी पिछले महीने 9,463 करोड़ रुपये का निवेश आया। कुल मिलाकर, गोल्ड और सिल्वर ETF में जनवरी 2026 तक 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश हो चुका है, जो एक रिकॉर्ड है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या निवेशकों को अब इक्विटी से पैसा निकालकर सोने में लगाना चाहिए, या यह सिर्फ एक अस्थायी चलन है?
वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म Wealthy.in के को-फाउंडर आदित्य अग्रवाल बताते हैं कि सोने को हमेशा से एक 'सेफ हेवन' यानी सुरक्षित निवेश माना जाता है। जब शेयर बाजार में गिरावट का डर होता है, तो लोग ऐसे निवेश की ओर भागते हैं जो उन्हें स्थिरता दे सके। दुनिया भर में फैली अनिश्चितता, देशों के बीच तनाव, शेयर बाजार की अस्थिरता और सोने की रिकॉर्ड कीमतें, इन सब वजहों से निवेशक सुरक्षित विकल्प की तलाश में हैं। एक और बड़ी वजह है सोने का हालिया रिटर्न। जब कोई भी निवेश अच्छा प्रदर्शन करता है, तो लोग उसी में ज्यादा पैसा लगाना चाहते हैं, जिसे 'परफॉर्मेंस चेजिंग' कहते हैं। लेकिन यह समझना बहुत जरूरी है कि हर तेजी हमेशा के लिए नहीं रहती।आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मनीष श्रीवास्तव के अनुसार, इक्विटी में कुल निवेश पिछले महीने की तुलना में 9.12% घटकर ₹39,062 करोड़ हो गया है। यह दिखाता है कि एक मजबूत दौर के बाद थोड़ी नरमी आई है, लेकिन फिर भी इक्विटी में निवेश पॉजिटिव बना हुआ है। इससे यह साफ है कि निवेशक इक्विटी से पूरी तरह बाहर नहीं निकले हैं। एसआईपी (SIP) के जरिए होने वाला निवेश अभी भी मजबूत है और लोग नियमित रूप से पैसा लगा रहे हैं।
सोने के ETF में निवेश बढ़ने की एक और वजह यह है कि सोने की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। जब किसी चीज़ की कीमत बढ़ती है, तो लोग उसे खरीदना चाहते हैं, खासकर अगर उन्हें लगता है कि यह और बढ़ेगी। गोल्ड ETF निवेशकों को सोने में सीधे निवेश करने का एक आसान तरीका देता है, बिना असली सोना खरीदे और संभाले। यह उन्हें सोने की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का फायदा उठाने का मौका देता है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को सिर्फ सोने के बढ़ते दामों को देखकर तुरंत इक्विटी से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। इक्विटी में लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न देने की क्षमता होती है। बाजार की अस्थिरता के बावजूद, एसआईपी के जरिए नियमित निवेश जारी रखना एक अच्छी रणनीति हो सकती है। यह निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव का औसत लाभ उठाने में मदद करता है।
कुल मिलाकर, सोने के ETF में निवेश का बढ़ना एक महत्वपूर्ण संकेत है, लेकिन यह निवेशकों के लिए अपनी पूरी निवेश रणनीति पर फिर से विचार करने का समय है। यह समझना जरूरी है कि हर निवेश की अपनी खूबियां और खामियां होती हैं। सोने को एक सुरक्षित निवेश के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन लंबी अवधि के धन निर्माण के लिए इक्विटी अभी भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। निवेशकों को अपनी जोखिम लेने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर एक संतुलित पोर्टफोलियो बनाना चाहिए।