गर्मी की दस्तक के साथ लौटने लगे मेहमान परिंदे

नवभारत टाइम्स

गर्मी की शुरुआत के साथ ही प्रवासी पक्षी अपने वतन लौटने लगे हैं। सुल्तानपुर नेशनल पार्क में इस बार पक्षियों की विदाई सामान्य समय से पहले हो गई है। तापमान में अचानक वृद्धि और सर्दी के छोटे होते मौसम के कारण यह बदलाव आया है।

heats arrival early departure of migratory birds a cause for concern
गुड़गांव के सुल्तानपुर नैशनल पार्क में इस बार प्रवासी पक्षियों ने सामान्य से पहले ही विदाई ले ली है। जहाँ हर साल फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत तक विदेशी मेहमानों की चहचहाहट सुनाई देती थी, वहीं इस बार फरवरी के मध्य से ही उनकी आवाज़ कम होने लगी है। बर्ड वॉचर्स का मानना है कि तापमान में अचानक बढ़ोतरी और सर्दी के छोटे होते मौसम की वजह से ऐसा हुआ है। इस सीजन में पार्क में साइबेरिया, रूस, मंगोलिया, कजाकिस्तान और मध्य एशिया के देशों से हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी आए थे।

पार्क की झीलों में बार-हेडेड गूज, नॉर्दर्न पिनटेल, कॉमन टील, यूरेशियन विजन, नॉर्दन शॉवलर और कॉमन पोचार्ड जैसी कई तरह की बतखें, पेलिकन और जलपक्षी देखने को मिले थे। लेकिन फरवरी के दूसरे हफ्ते तक इनकी संख्या में भारी कमी देखी गई। बर्ड वॉचर अनिल गंडास बताते हैं कि पिछले सालों में ये पक्षी फरवरी के आखिर तक यहीं रुकते थे। लेकिन इस बार फरवरी के पहले हफ्ते से ही झील के आसपास इनकी संख्या घटने लगी। उन्होंने कहा, "औसत तापमान सामान्य से अधिक रहा, जिससे इनके लिए अनुकूल वातावरण लंबे समय तक नहीं बन पाया।"
फिलहाल पार्क में करीब 8 से 10 हजार पक्षी ही दिख रहे हैं, जिनमें ज़्यादातर स्थानीय या डोमेस्टिक प्रजातियां हैं। अब झीलों पर स्पॉट-बिल्ड डक, कॉर्मोरेंट, बगुले और स्थानीय गीज ज़्यादा नज़र आ रहे हैं, जबकि विदेशी मेहमानों की मौजूदगी काफी कम हो गई है। तापमान में बढ़ोतरी ने इन पक्षियों के लिए यहाँ रुकना मुश्किल बना दिया है। ये पक्षी आमतौर पर ठंडे मौसम में प्रवास करते हैं और जब मौसम गर्म होने लगता है तो अपने मूल स्थानों की ओर लौट जाते हैं। इस बार सर्दी जल्दी खत्म होने और गर्मी जल्दी आने की वजह से उन्हें जल्दी लौटना पड़ा।

प्रवासी पक्षियों का जल्दी चले जाना पर्यावरण में हो रहे बदलावों का संकेत है। यह दिखाता है कि कैसे जलवायु परिवर्तन हमारे वन्यजीवों को प्रभावित कर रहा है। इन पक्षियों का आना और जाना एक प्राकृतिक चक्र का हिस्सा है, लेकिन जब यह चक्र बिगड़ता है तो यह चिंता का विषय बन जाता है। बर्ड वॉचर्स उम्मीद कर रहे हैं कि अगले साल मौसम सामान्य रहेगा और प्रवासी पक्षी अपने तय समय पर पार्क में लौटेंगे। तब तक, स्थानीय पक्षी ही सुल्तानपुर नैशनल पार्क की शोभा बढ़ाएंगे।