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नवभारत टाइम्स

सेक्लोर के सीईओ विशाल गौरी ने बताया कि AI ने डेटा जोखिम को बदल दिया है। डेटा अब AI से लोगों की तरह बहता है, पर बिना पूरी जानकारी के। कंपनियां AI का जिम्मेदारी से उपयोग करना चाहती हैं तो उन्हें डेटा के इस्तेमाल पर भरोसा और नियंत्रण रखना होगा। सेक्लोर ने ARMOR लॉन्च किया है।

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सेक्लोर के सीईओ विशाल गौरी ने बताया कि AI के आने से कंपनियों के डेटा से जुड़े जोखिमों का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। अब डेटा AI से उसी तरह बहता है जैसे लोगों के बीच, लेकिन इसमें न तो उतनी जानकारी मिलती है और न ही उतनी जवाबदेही तय होती है। अगर कंपनियां AI का इस्तेमाल जिम्मेदारी से करना चाहती हैं, तो उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर बार डेटा का इस्तेमाल कैसे हो रहा है, इस पर उनका भरोसा और नियंत्रण बना रहे। यह बात उन्होंने सेक्लोर को एक डेटा सिक्योरिटी इंटेलिजेंस कंपनी के तौर पर फिर से स्थापित करने के मौके पर कही, जहाँ उन्होंने ARMOR (ऑटोमेटेड रिस्क मैनेजमेंट, ऑर्केस्ट्रेशन, और रेसिलिएंस) को लॉन्च किया। गौरी ने कहा कि इससे कंपनियों को डेटा और AI से जुड़े जोखिमों को संभालने में मदद मिलेगी, जिससे वे ऑपरेशनल तौर पर तैयार रहेंगी और बोर्ड स्तर पर भी उनका भरोसा बढ़ेगा।

विशाल गौरी ने इस बात पर जोर दिया कि AI के कारण डेटा का प्रवाह अब पहले जैसा नहीं रहा। पहले डेटा का प्रवाह इंसानों के बीच होता था, जहाँ चीजें थोड़ी पारदर्शी होती थीं। लेकिन AI के साथ, डेटा का प्रवाह बहुत तेज और व्यापक हो गया है, जिससे यह समझना मुश्किल हो जाता है कि डेटा कहाँ जा रहा है और उसका इस्तेमाल कैसे हो रहा है।
उन्होंने बताया कि सेक्लोर ने खुद को एक डेटा सिक्योरिटी इंटेलिजेंस कंपनी के रूप में पेश किया है। इस नई पहचान के तहत, उन्होंने ARMOR नाम का एक नया समाधान पेश किया है। ARMOR का मतलब है ऑटोमेटेड रिस्क मैनेजमेंट, ऑर्केस्ट्रेशन, और रेसिलिएंस। यह सिस्टम कंपनियों को डेटा और AI से जुड़े जोखिमों को बेहतर ढंग से समझने और प्रबंधित करने में मदद करेगा।

गौरी के अनुसार, ARMOR कंपनियों को ऑपरेशनल तौर पर मजबूत बनाएगा। इसका मतलब है कि वे अपने दैनिक कामकाज में डेटा और AI का सुरक्षित रूप से उपयोग कर सकेंगी। साथ ही, यह बोर्ड-लेवल कॉन्फिडेंस को भी बढ़ाएगा। यानी, कंपनी के बड़े अधिकारी और निदेशक मंडल भी डेटा सुरक्षा को लेकर निश्चिंत रहेंगे। यह समाधान कंपनियों को यह भरोसा दिलाएगा कि वे AI का इस्तेमाल करते हुए भी अपने डेटा को सुरक्षित रख सकते हैं।