Noida Athletes On Agneepath Practicing On Incomplete Flyover
हाईटेक नोएडा में खिलाड़ियों का ये है ‘अग्निपथ’
नवभारत टाइम्स•
हाईटेक नोएडा में खिलाड़ियों के लिए खेल सुविधाओं का अभाव है। करोड़ों की लागत से बने चमचमाते स्टेडियमों में एथलेटिक्स ट्रैक नहीं हैं। खिलाड़ी सूरजपुर साइट-सी में बन रहे अधूरे फ्लाईओवर पर अभ्यास कर रहे हैं। यह स्थिति खेल अधिकारियों के दावों की पोल खोल रही है। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को ट्रायल के लिए दूसरे शहरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के होनहार एथलीट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं, लेकिन हाईटेक कहलाने वाले इन शहरों में खेल सुविधाओं का घोर अभाव है। करोड़ों की लागत से बने चमचमाते स्टेडियमों में एथलेटिक्स ट्रैक की सुविधा न होने के कारण, उभरते खिलाड़ी सूरजपुर साइट-सी में बन रहे एक अधूरे फ्लाईओवर पर अभ्यास करने को मजबूर हैं। खेल सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच, खिलाड़ियों का यह संघर्ष अधिकारियों की पोल खोल रहा है।
सूरजपुर साइट-सी में पैरामाउंट गोल्फ फारेस्ट सोसायटी के पास बन रहा एक अधूरा फ्लाईओवर अब शहर का अनौपचारिक एथलेटिक्स ट्रैक बन गया है। एथलेटिक्स कोच सोनू भाटी बताते हैं कि शहर में ट्रैक की सुविधा न होने की वजह से 50 से 60 खिलाड़ी मजबूरी में इस बंद पड़े फ्लाईओवर पर दौड़ते हैं। फ्लाईओवर की काली सतह पर दौड़ने और कूदने जैसे व्यायाम तो हो जाते हैं, लेकिन कंक्रीट की सख्त सतह पर लंबे समय तक अभ्यास करना खिलाड़ियों के घुटनों और सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।दावों के बावजूद सरकारी स्टेडियमों की हालत खस्ता है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के दो बड़े स्टेडियमों के अलावा, खेल विभाग और युवा कल्याण विभाग के तीन स्टेडियम (मलकपुर, दुजाना और दादरी) भी हैं। इसके बावजूद, अर्जुन और लक्ष्मण अवॉर्डी एथलीटों वाले इस शहर में एक भी ढंग का रनिंग ट्रैक नहीं है। मलकपुर स्टेडियम की स्थिति तो सबसे खराब है, जहां न तो रनिंग ट्रैक है और न ही भाला फेंक, गोला फेंक या लॉन्ग जंप जैसी प्रतियोगिताओं के लिए कोई व्यवस्था है। गरीब परिवारों से आने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को ट्रायल देने के लिए दूसरे शहरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
यह स्थिति तब है जब जिले के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहरा रहे हैं। इन खिलाड़ियों की मेहनत और लगन काबिल-ए-तारीफ है, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाओं से भी महरूम रखा जा रहा है। अधिकारियों द्वारा खेल सुविधाओं के नाम पर किए जाने वाले वादे और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर साफ दिखाई दे रहा है। खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए सुरक्षित और उपयुक्त जगह न मिलना, उनकी प्रगति में एक बड़ी बाधा है।
यह अधूरे फ्लाईओवर पर अभ्यास करने वाले खिलाड़ी सिर्फ एक उदाहरण हैं। ऐसे कई युवा हैं जो बेहतर सुविधाओं के अभाव में अपने खेल को आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। यह जरूरी है कि प्रशासन इन खिलाड़ियों की समस्याओं को समझे और उन्हें वह सुविधाएं प्रदान करे जिसके वे हकदार हैं। ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी बेहतर प्रदर्शन कर सकें और देश का नाम रोशन कर सकें।