second lead ke niche_कॉपर मार्केट में क्यों बढ़ रहा तनाव!

नवभारत टाइम्स

कॉपर की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव से निवेशक हैरान हैं। जानकार इसे भविष्य का मार्केट किंग बता रहे हैं और भारी तेजी की संभावना जता रहे हैं। तांबे का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में मांग बढ़ने और कीमतों में तेजी आने की उम्मीद है।

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सोने-चांदी की तरह तांबे की कीमतों में भी बड़े उतार-चढ़ाव से निवेशक हैरान हैं। जानकारों का कहना है कि तांबा भविष्य में मार्केट का नया 'किंग' बन सकता है और इसकी कीमतों में भारी तेजी की उम्मीद है। लेकिन फिलहाल, तांबे की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। बाजार के मौजूदा हालात को देखकर यह कहना मुश्किल है कि कीमतें बढ़ेंगी या घटेंगी। हालांकि, जिस तेजी से तांबे का इस्तेमाल बढ़ रहा है, उससे यह उम्मीद की जा सकती है कि भविष्य में इसकी भारी मांग के कारण कीमतें बढ़ सकती हैं।

हाल ही में, दक्षिण अमेरिका और इंडोनेशिया में सप्लाई में आई रुकावटों और टैरिफ (आयात-निर्यात शुल्क) के कारण तांबे की कीमतों में बड़ी तेजी आई थी। लेकिन पिछले कुछ समय से कीमतें कम हो रही हैं। इसका एक बड़ा कारण यह बताया जा रहा है कि जनवरी में तांबे के उत्पादन (स्मेल्टिंग) में पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर देखा गया। इस वजह से बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। जनवरी में, दुनिया भर की तांबा उत्पादन क्षमता का 14.3% इस्तेमाल नहीं हो पाया। यही वजह हो सकती है कि तांबे की कीमतों में गिरावट आई है।
जानकार तांबे को भविष्य का 'किंग' बता रहे हैं। उनका मानना है कि आने वाले समय में इसकी मांग बहुत ज्यादा बढ़ेगी। लेकिन फिलहाल बाजार में जो हो रहा है, उससे निवेशक थोड़े परेशान हैं। सोने और चांदी की तरह तांबे की कीमतों में भी काफी ऊपर-नीचे हो रहा है। यह कहना मुश्किल है कि आगे क्या होगा।

तांबे का इस्तेमाल कई जगहों पर बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक गाड़ियां, रिन्यूएबल एनर्जी (जैसे सोलर पैनल और विंड टर्बाइन) और इलेक्ट्रॉनिक्स में तांबे की जरूरत बहुत ज्यादा है। जैसे-जैसे ये चीजें ज्यादा इस्तेमाल होंगी, तांबे की मांग भी बढ़ेगी। इसी वजह से जानकारों को लगता है कि भविष्य में तांबे की कीमतें बढ़ सकती हैं।

लेकिन सप्लाई में दिक्कतें भी आ रही हैं। दक्षिण अमेरिका और इंडोनेशिया जैसे बड़े तांबा उत्पादक देशों में उत्पादन में रुकावटें आई हैं। इसके अलावा, टैरिफ के कारण भी कीमतें बढ़ी थीं। अब जब उत्पादन कम हुआ है, तो बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। जनवरी में तांबे का उत्पादन इतना कम था कि यह पिछले 10 सालों में सबसे कम था। इसका मतलब है कि बाजार में तांबा कम पहुंच रहा है, जिससे कीमतों पर असर पड़ रहा है।