सज्जनता उपाधि नहीं

नवभारत टाइम्स

राजा जेम्स चार्ल्स स्टुअर्ट ने एक व्यक्ति को सज्जन की उपाधि देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि सज्जनता खरीदी नहीं जा सकती। यह उपाधियों से नहीं, संस्कारों से आती है। यह घटना सिखाती है कि पद और प्रतिष्ठा बाहर से मिल सकते हैं, पर चरित्र भीतर से बनता है। यह राजा जेम्स के ज्ञान को दर्शाता है।

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जेम्स प्रथम, जो 19 जून 1566 को एडिनबर्ग में पैदा हुए थे, इंग्लैंड के राजा बने और खुद को ग्रेट ब्रिटेन का राजा घोषित किया। वे अपने खजाने को भरने के लिए जाने जाते थे, जिसके लिए वे पैसे लेकर उपाधियां भी बेचते थे। राजा जेम्स का मानना था कि पद और प्रतिष्ठा बाहर से मिल सकती है, लेकिन असली चरित्र अंदर से बनता है। एक बार एक व्यक्ति ने उनसे सज्जन की उपाधि मांगी, जिसके लिए वह पैसे देने को तैयार था। राजा ने जवाब दिया, "मैं तुम्हें लॉर्ड, ड्यूक या दार्शनिक बना सकता हूं, पर सज्जन नहीं। सज्जनता खरीदी नहीं जाती, वह तो संस्कारों से जन्म लेती है।"

राजा जेम्स प्रथम का जन्म 19 जून 1566 को एडिनबर्ग के शाही किले में हुआ था। जब इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम का निधन हुआ, तो जेम्स को राजगद्दी मिली। उन्होंने खुद को पूरे ग्रेट ब्रिटेन का राजा घोषित कर दिया। राजा जेम्स अपनी आर्थिक नीतियों के लिए जाने जाते थे। वे अपने राजकोष को मजबूत और समृद्ध बनाना चाहते थे।
कहा जाता है कि राजा जेम्स अपने खजाने को भरने के लिए धन के बदले उपाधियां भी बेचते थे। उन्हें यह अच्छी तरह पता था कि उपाधि से कोई महान नहीं बन जाता। फिर भी, कुछ लोगों के घमंड को संतुष्ट करके राजकोष भरना उन्हें एक अच्छा तरीका लगा।

एक दिन, एक व्यक्ति राजा जेम्स के पास आया। उसने राजा से विनती की, "महाराज, मुझे सज्जन की उपाधि दे दीजिए। इसके लिए जो भी धन चाहिए, वह देने के लिए मैं तैयार हूं।"

राजा जेम्स ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "मैं तुम्हें लॉर्ड, ड्यूक या दार्शनिक बना सकता हूं, पर सज्जन नहीं। सज्जनता खरीदी नहीं जाती, वह तो संस्कारों से जन्म लेती है।"

राजा जेम्स का यह जवाब सुनकर वह व्यक्ति चुप रह गया। उसे कोई उत्तर नहीं सूझा। यह किस्सा हमें सिखाता है कि पद और सम्मान बाहर से मिल सकते हैं। लेकिन असली चरित्र और अच्छाई तो हमारे अंदर से ही आती है। यह हमारे संस्कारों और व्यवहार से बनती है, न कि किसी उपाधि या पैसे से।