रात से भयभीत हो गए तो सुबह का प्रकाश कभी नहीं आ पाएगा

Contributed byजैन मुनिश्री तरुणसागर जी|नवभारत टाइम्स

जीवन में मन की शांति सबसे महत्वपूर्ण है। इसके बिना सब कुछ व्यर्थ है। कठिनाइयों से डरना नहीं चाहिए। रात से भयभीत होने पर सुबह कभी नहीं आएगी। मन को मजबूत रखें। मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। जो मन से मजबूत होता है, वही सफल होता है। मजबूती से आगे बढ़ें।

peace of mind the essence of life the path to overcoming difficulties
महावीर के पेड़ के नीचे ध्यान करते समय बच्चों द्वारा फेंके गए पत्थर से सिर पर चोट लगने की घटना, संसार के प्रति आसक्ति को दुख का कारण बताना, और कठिनाइयों से घबराए बिना मन को मजबूत करने की सीख देते हुए यह लेख जीवन के सार को समझाता है। यह बताता है कि कैसे पेड़ ने पत्थर मारने वाले बच्चों को मीठे फल दिए, जबकि महावीर स्वयं कुछ न दे पाने के कारण दुखी हुए। लेख में यह भी बताया गया है कि नमक के बिना भोजन, मूर्ति के बिना मंदिर, डॉक्टर के बिना अस्पताल, ब्रेक के बिना गाड़ी और मन की शांति के बिना जीवन व्यर्थ है। पिता के मकान जलने पर भी न रोने और फिर बेचने की बात न होने पर रोने की कहानी से अपनापन और लगाव को दुख का कारण बताया गया है। अंत में, रात से डरने पर सुबह न आने की बात कहकर, मन को मजबूत करने और 'मन के हारे हार है, मन के जीते जीत' के सिद्धांत पर चलने की प्रेरणा दी गई है।

एक बार की बात है, भगवान महावीर एक पेड़ के नीचे गहरी ध्यान मुद्रा में बैठे थे। उस पेड़ पर रसीले आम लगे हुए थे। कुछ बच्चे भी वहीं खेल रहे थे। खेलते-खेलते उन्होंने पत्थर उठाकर आम तोड़ने शुरू कर दिए। दुर्भाग्यवश, एक पत्थर सीधा महावीर के सिर पर आ लगा और उनके सिर से खून बहने लगा। यह देखकर बच्चे घबरा गए और उन्होंने महावीर से माफी मांगी। उन्होंने कहा, 'प्रभु! हमें माफ कर दीजिए, हमारी वजह से आपको तकलीफ हुई।'
लेकिन महावीर ने बड़े ही शांत भाव से कहा, 'नहीं, मुझे कोई कष्ट नहीं है।' बच्चों को आश्चर्य हुआ और उन्होंने पूछा, 'तो फिर आपकी आंखों में आंसू क्यों हैं?' महावीर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, 'जब तुमने पेड़ पर पत्थर मारा, तो उसने तुम्हें बदले में मीठे फल दिए। पर मैं तुम्हें कुछ भी नहीं दे सका, इसी बात का मुझे दुख है।' यह सुनकर बच्चे और भी शर्मिंदा हो गए।

यह घटना हमें सिखाती है कि जीवन में कुछ चीजें कितनी जरूरी हैं। जैसे, अगर खाने में बाकी सब कुछ हो, पर नमक न हो, तो खाना बिल्कुल बेस्वाद हो जाता है। इसी तरह, मंदिर में सब कुछ हो, पर भगवान की मूर्ति न हो, तो वह मंदिर अधूरा है। अस्पताल में सब कुछ हो, पर डॉक्टर न हो, तो वह अस्पताल किसी काम का नहीं। गाड़ी में सब कुछ हो, पर ब्रेक न हो, तो वह गाड़ी जानलेवा साबित हो सकती है। और सबसे महत्वपूर्ण बात, जीवन में सब कुछ हो, पर मन की शांति न हो, तो पूरा जीवन ही व्यर्थ है।

लेख में यह भी समझाया गया है कि असल में संसार दुख नहीं है, बल्कि संसार के प्रति हमारी जो आसक्ति या मोह है, वही दुख का कारण बनती है। इसे एक कहानी से समझाते हैं। एक बार एक मकान में आग लग गई। पिता जोर-जोर से रोने लगा। पड़ोसियों ने पूछा कि क्या हुआ, तो पिता ने बताया कि मकान जल रहा है। पड़ोसियों ने कहा, 'अरे, यह मकान तो आपके बेटे ने कल ही बेच दिया था।' यह सुनते ही पिता का रोना एकदम बंद हो गया। तभी उसका बेटा दौड़ता हुआ आया और बोला, 'पिताजी! मकान जल रहा है और आप यहां खड़े हैं...' पिता ने कहा, 'लेकिन तुमने तो यह मकान बेच दिया था ना!' बेटे ने कहा, 'बेचने की बात तो चल रही थी, पर अभी बिका नहीं है।' इतना सुनना था कि पिता फिर से दहाड़ मारकर रोने लगा। यह दिखाता है कि अपनापन और लगाव ही हमें रुलाता है।

कठिनाइयों से कभी घबराना नहीं चाहिए। अगर हम रात से ही डर जाएंगे, तो कभी सुबह नहीं देख पाएंगे। हमें मजबूती से आगे बढ़ते रहना चाहिए। बस थोड़ी देर और, सुबह होने ही वाली है। अपने मन को मजबूत बनाना सबसे जरूरी है। कमजोर मन से इस दुनिया में कुछ भी हासिल नहीं होता। हमेशा याद रखें - 'मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।' जो इंसान मन से हार मान लेता है, उसकी नैया तो डूब ही जाती है। लेकिन जो मन से मजबूत बन जाता है, वह सिकंदर की तरह दुनिया जीत सकता है।