बंधवाड़ी लैंडफिल के प्रबंधन का जिम्मा अब दो नई कंपनियों को

नवभारत टाइम्स

गुड़गांव-फरीदाबाद सीमा पर स्थित बंधवाड़ी लैंडफिल के प्रबंधन का जिम्मा अब दो नई कंपनियों को मिला है। इन कंपनियों को 63-63 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया है। पूर्व में काम कर रही इको ग्रीन कंपनी का एग्रीमेंट रद्द कर दिया गया था। नई कंपनियां 14 लाख टन कूड़ा निस्तारण का काम करेंगी।

bhandwari landfill management two new companies awarded 126 crore contract eco green agreement cancelled
हरियाणा सरकार ने गुड़गांव-फरीदाबाद सीमा पर स्थित बंधवाड़ी लैंडफिल (कचरा जमा करने की जगह) के प्रबंधन, बॉयो-माइनिंग (कचरे से उपयोगी चीजें निकालना) और कचरा निस्तारण का जिम्मा दो नई कंपनियों को सौंपा है। इन दोनों कंपनियों को 63-63 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया है। इससे पहले, इको ग्रीन नाम की कंपनी यह काम कर रही थी, लेकिन सरकार ने उससे अपना समझौता रद्द कर दिया था। कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि कूड़ा उठाने वाली कंपनियों ने ठीक से काम नहीं किया, जिससे बंधवाड़ी में कूड़े का पहाड़ बन गया है और पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, जिससे बीमारियां फैल रही हैं।

स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने बताया कि 2017 में इको ग्रीन को 330 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया था, लेकिन उनका काम संतोषजनक नहीं था। इसलिए, 14 अगस्त, 2024 को सरकार ने यह ठेका रद्द कर दिया। इको ग्रीन कंपनी इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई थी। मंत्री गोयल ने कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से नए ठेकेदार के लिए मंजूरी मांगी और कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद, अब 14 लाख टन कचरा निस्तारण का काम दो नई कंपनियों को सौंपा गया है।
इन दोनों कंपनियों को 63-63 करोड़ रुपये का ठेका मिला है। इनमें से एक कंपनी ने अपना काम शुरू कर दिया है, जबकि दूसरी कंपनी मार्च में काम शुरू करेगी। मंत्री गोयल ने बताया कि ये दोनों कंपनियां वर्ष 2027 तक अपना काम पूरा कर लेंगी। जब विधायक कुलदीप वत्स ने कूड़े के पहाड़ का मुद्दा उठाया, तो मंत्री गोयल ने स्वीकार किया कि वर्तमान में वहां 16 लाख टन कचरा जमा है। इसके अलावा, रोजाना चार हजार टन से अधिक कचरा और भी आ रहा है। इस कचरे को चरणबद्ध तरीके से निपटाया जा रहा है।

विधायक कुलदीप वत्स के इस आरोप पर कि कूड़े के ढेर से बीमारियां फैल रही हैं, मंत्री गोयल ने जवाब दिया कि बंधवाड़ी लैंडफिल से डेढ़ किलोमीटर की दूरी तक न तो कोई कृषि योग्य भूमि है और न ही कोई गांव बसा हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरे काम की निगरानी आईआईटी रुड़की जैसी तीसरी पार्टी द्वारा की जा रही है। इसके अलावा, अन्य सरकारी विभाग भी नियमित रूप से इस जगह की निगरानी कर रहे हैं।

सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि पुरानी कंपनी इको ग्रीन अपना काम ठीक से नहीं कर पा रही थी। कूड़े के पहाड़ से होने वाले प्रदूषण और बीमारियों के खतरे को देखते हुए, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी से नए ठेकेदार नियुक्त किए हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि काम समय पर और सही तरीके से हो, सरकार ने दो कंपनियों को यह जिम्मेदारी सौंपी है और उनके काम की निगरानी भी की जा रही है। यह उम्मीद है कि नई कंपनियां इस समस्या का समाधान करेंगी और पर्यावरण को बेहतर बनाने में मदद करेंगी।