Customers Troubled Harassed By Hidden Charges Forced Services And Confusing Terms
किस तरह की परेशानी?
नवभारत टाइम्स•
ग्राहकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। छिपे हुए चार्जेस और बिना सहमति के अतिरिक्त शुल्क आम हैं। लोग जबरन दूसरी सेवाएं लेने को मजबूर हैं। बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन और वादे से अलग सर्विस मिलने से भी वे त्रस्त हैं।
आजकल ग्राहक सेवाओं से बेहद परेशान हैं। छिपे हुए चार्जेस , बिना सहमति के एक्स्ट्रा चार्ज , जबरन दूसरी सर्विस लेने का दबाव, बार-बार नोटिफिकेशन , वादे से अलग सर्विस मिलना, उलझाने वाली भाषा, सर्विस बंद करने की मुश्किल शर्तें और ऐप के गुमराह करने वाले डिज़ाइन जैसी समस्याओं से 64% से लेकर 37% तक ग्राहक जूझ रहे हैं। यह सब ग्राहकों के भरोसे को तोड़ रहा है और उन्हें ठगा हुआ महसूस करा रहा है।
सर्वे के मुताबिक, 64% ग्राहक छिपे हुए चार्जेस से परेशान हैं। यानी, उन्हें पता ही नहीं चलता कि कब और कहाँ से अतिरिक्त पैसे कट गए। वहीं, 57% ग्राहक तो बिना पूछे ही एक्स्ट्रा चार्ज के शिकार हो जाते हैं। यह ग्राहकों के साथ सीधा धोखा है।इसके अलावा, 51% ग्राहक ऐसे हैं जिन्हें जबरन कोई दूसरी सर्विस लेने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्हें वह सर्विस चाहिए ही नहीं, फिर भी उन्हें लेने के लिए कहा जाता है। 46% ग्राहक बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन (Nagging) से भी तंग आ चुके हैं। ये नोटिफिकेशन इतने ज्यादा आते हैं कि सिरदर्द बन जाते हैं।
एक और बड़ी समस्या यह है कि 46% ग्राहक वादे से अलग सर्विस मिलने के शिकार होते हैं। जो सर्विस देने का वादा किया गया था, वह मिलती ही नहीं। 45% ग्राहक तो उलझाने वाली भाषा में फंस जाते हैं। कंपनियों की भाषा इतनी जटिल होती है कि आम आदमी उसे समझ ही नहीं पाता।
साथ ही, 45% ग्राहक सर्विस बंद करने की मुश्किल शर्तों में उलझ जाते हैं। उन्हें सर्विस बंद करनी होती है, लेकिन कंपनी ऐसी शर्तें रखती है कि बंद करना नामुमकिन सा हो जाता है। अंत में, 37% ग्राहक ऐप के गुमराह करने वाले डिज़ाइन का शिकार होते हैं। ऐप का डिज़ाइन ऐसा बनाया जाता है कि ग्राहक गलती कर बैठें और कंपनी को फायदा हो।